अब जुर्माना करने में भी जिला संगरूर अव्वल

Firozpur Updated Sun, 17 Jun 2012 12:00 PM IST
संगरूर। भले ही जिला संगरूर धान और गेहूं की रिकार्ड पैदावार करने में प्रदेश में अव्वल रहता है, किंतु एक कड़वी सच्चाई यह भी सामने आई है कि इसी जिले के लोग राज्य के अन्य जिलों की तुलना में घटिया खाद्य पदार्थ खाने को मजबूर हो रहे हैं। उक्त सच्चाई का खुलासा सेहत विभाग द्वारा मई महीने में लिए गए 21 नमूनों की रिपोर्ट से हुआ है। इसमें 16 नमूने फेल हो गए हैं और इसके एवज में 1,42,500 रुपये के जुर्माने किए हैं। एक माह के भीतर इतनी भारी राशि के जुर्माना करना एक रिकार्ड है।
एडीसी कम एडजूकेटिंग अधिकारी इंदू मल्होत्रा ने बताया कि गत एक माह के दौरान जिला सेहत अधिकारी डा. सुरिंद्र सिंगला के नेतृत्व में टीम ने विभिन्न शहरों के कारोबारों में भरे गए नमूनों में से सुरिंद्र कुमार बेनड़ा के कोल्ड ड्रिंक्स बनाने वालों के दो नमूने फेल हुए, जिसके तहत उसे 15 हजार रुपये जुर्माना किया गया। इसी तरह अनिल कुमार निवासी धूरी के सरसों के तेल का नमूना फेल होने पर उसे 10 हजार रुपये जुर्माना, रजिंद्र कुमार निवासी संगरूर के दही का नमूना फेल होने पर पांच हजार जुर्माना, तेजपाल निवासी धूरी का पनीर का नमूना फेल होने पर पांच हजार रुपये जुर्माना, गोरा लाल भवानीगढ़ के दाल भुजिया का नमूना फेल होने पर पांच हजार रुपये जुर्माना, अमृत सिंह मालेरकोटला का रिफाइंड तेल का नमूना फेल होने पर बीस हजार रुपये जुर्माना, तेजपाल सिंह संतोखपुरा का नमकीन का नमूना फेल होने पर दस हजार रुपये जुर्माना, विजय कुमार धूरी का डेयरी गाय का दूध का नमूना फेल होने पर साढे़ सात हजार रुपये जुर्माना, रमनीश गुप्ता का सनो बीम आइसक्रीम का नमूना फेल होने पर पांच हजार जुर्माना, शाम लाल सुनाम का लक्ष्मी नमकीन का सेंपल फेल होने पर दस हजार रुपये जुर्माना, वीरभान महलां चौक का पनीर का सैंपल फेल होने पर पांच हजार रुपये जुर्माना, चंद्रकांता रामनगर सीबिया के बिस्कुट का नमूना फेल होने पर दस हजार रुपये और लाइसेंस न होने पर पांच हजार रुपये (कुल पंद्रह हजार) का जुर्माना, राजू धूरी का दूध का नमूना फेल होने पर पांच हजार और लाइसेंस न होने पर पांच हजार रुपये (कुल दस हजार) का जुर्माना, मनजिंद्र सिंह लुधियाना का चटनी का नमूना फेल होने पर बीस हजार जुर्माना किया गया है।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी सुरिंद्र सिंगला ने बताया कि नए फूड सेफ्टी एक्ट के तहत खाने पीने की वस्तुओं का कारोबार करने वाले व्यक्ति को उसकी वार्षिक टर्नओवर के मुताबिक सेहत विभाग के पास रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है। जिनकी वार्षिक टर्नओवर 12 लाख रुपये से कम है, वह सिर्फ सौ रुपये भरकर सेहत विभाग से रजिस्ट्रेशन ले सकते हैं और जिन अदारों की सालाना टर्नओवर 12 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें सेहत विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य है, ताकि किसी भी परेशानी से बचा जा सके। ऐसा न करने की सूरत में एक लाख तक का जुर्माना और छह महीने की सजा या दोनों भी हो सकते हैं।

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