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चाहे कुछ भी करो, 31 जुलाई तक ही चलेगी ट्रेन

Firozpur Updated Sun, 03 Jun 2012 12:00 PM IST
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फाजिल्का (फिरोजपुर)। ‘चाहे कोई भूख हड़ताल करे, रोष प्रदर्शन करे, मेरे पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा, नए बने रेलवे ट्रैक पर 31 जुलाई तक ही गाड़ी चलेगी। इस बात पर मैं अटल हूं और मेरे पर भूख हड़ताल करके किसी किस्म का दबाव डालने की कोशिश न की जाए।’ यह बात फाजिल्का पहुंचे फिरोजपुर डिविजन के डीआरएम एनसी गोयल ने कही। उन्होंने कहा कि भूख हड़ताल या धरने देने से कोई गाड़ी नहीं चलेगी। सर्वप्रथम रेलवे विभाग को नए बने ट्रैक पर गाड़ियां चलाने के लिए सुरक्षा और जरूरी स्टाफ का प्रबंध करना जरूरी है, इसके बाद ही गाड़ी चल सकेगी। उन्होंने अफसरी लहजे में कहा कि भूख हड़ताल करने का मकसद सिर्फ यही है कि हर कोई गाड़ी चलाने का क्रेडिट लेना चाहता है।
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इससे पहले फाजिल्का-अबोहर रेल ट्रैक पर ट्रेन चलाने को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे संस्थाओं के नेताओं को जब पता चला कि डीआरएम गोयल शनिवार को फाजिल्का आ रहे हैं तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना न रहा। उन्होंने सोचा कि शायद रेल अधिकारी उनको यह आश्वासन देने के लिए आ रहे हैं कि जल्द ही फाजिल्का से अबोहर रेलगाड़ी चला दी जाएगी, लेकिन फाजिल्का पहुंचे डीआरएम का जवाब सुनकर सब दंग रह गए। रेलवे स्टेशन में नए बने वेटिंग हाल और शौचालयों की बुरी हालत के बारे जब बताया गया तो डीआरएम ने स्टेशन मास्टर को फटकार लगाई। उन्होंने स्टेशन में बंद पड़े शौचालयों और वाटर कूलर को जल्द से जल्द ठीक करने के आदेश दिए। वहीं स्टेशन पर लगे बोर्ड मौके पर ही उतारे गए और उन वेटिंग हाल में नए बैंच लगाने के भी आदेश जारी किए गए। इसके अलावा 6 बजे लुधियाना जाने वाली गाड़ी को गुरुहरसहाए रेलवे स्टेशन पर दूसरी गाड़ी को क्रासिंग देने के लिए आधे घंटे के ठहराव के कारण यात्रियों की परेशानी को देखते हुए गाड़ी को आधा घंटा देरी से चलाने का भरोसा दिया।

जब पत्रकारों ने फाजिल्का अबोहर के नए बने रेल ट्रैक के बारे में जब डीआरएम से सामान चोरी होने के बारे पूछा तो कहा कि ये उनकी समस्या है, आपको चिंता करने की जरूरत नहीं। रेलवे बाउंड्री के साथ लगती दीवार में घटिया मेटीरियल को लेकर उन्होंने कहा कि आप सिविल इंजीनियर हो क्या। यह सवाल केवल सिविल इंजीनियर ही पूछ सकता है। जब पैसेंजर समिति ने उनको पुराने प्लेटफार्म को ऊंचा करने की गुहार लगाई तो उन्होंने कहा कि रेलवे विभाग के पास इतना धन नहीं है कि आप कहीं से फंड मुहैया करवा दो। जब उनको रेलवे के सामने बने पार्क की दुर्दशा बारे बताया तो उन्होंने कहा कि आप ही किसी समाजसेवी संगठन को कह दें, वह पार्क बना देंगे और वह उस संस्था का नाम पार्क में लिखवा देंगे।

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