सच्ची भावना से होंगे भगवान के दर्शन : आत्मानंद

Bathinda Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
कोटकपूरा (फरीदकोट)। मंदिर संतोषी माता बजरंग भवन में श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के पहले दिन सोमवार को प्रवचन करते हुए भागवत भूषण महामंडलेश्वर स्वामी आत्मानंद पुरी जी महाराज ने कहा कि भागवत को भगवान का ही स्वरूप कहा गया है। इससे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कलियुग में सच्ची भावना से ही भगवान के दर्शन होते हैं। भागवत कथा से जीव को ज्ञान वैराग्य और भक्ति की प्राप्ति होती है और मानव भव बंधन से रहित हो जाता है। स्वामी जी ने कहा कि मन की गति का तेज होना ही बंधन और मुक्ति का कारण है। मन से ही सुख दुख की प्राप्ति होती है जिसका मन निर्मल होता है उसी को भगवद् प्राप्ति होती है। सबसे पहले भगवान नारायण ने ब्रह्माजी को इस कथा का उपदेश दिया। उसके बाद ब्रह्माजी ने नारद जी को, नारद जी ने व्यास जी को, व्यास जी ने शुकदेव को उपदेश दिया। शुकदेव जी ने यह कथा राजा परीक्षित को सुनाई। इससे पहले सेठ केदार नाथ मंदिर से विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया गया जिसमें 108 महिलाओं ने अपने सिर पर कलश उठाए। इस मौके पर मंदिर कमेटी के शिवजी राम गोयल, सुधीर गुप्ता, चंद्रमोहन मित्तल, सुरिंदर कुमार बांसल, सतपाल गोयल, राम कुमार गर्ग, आशु गर्ग, सुभाष गोयल और सुभाष बांसल हाजिर हुए।

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