साइबेरियन बगुलों ने मचाया उत्पात

Bathinda Updated Thu, 19 Jul 2012 12:00 PM IST
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बठिंडा। जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर हरियाणा बार्डर से सटे गांव पथराला के लोग करीब 4500 प्रवासी पक्षियों (साइबेरियन बगुलों) द्वारा फैलाई जा रही गंदगी के चलते घर छोड़ने को मजबूर हैं। गंदगी से बचने के लिए ग्रामीणों का कोई उपाय काम नहीं आ रहा। बगुलों की गंदगी से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं।
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पथराला में इस समय अद्भुत नजारा दिखाई दे रहा है। अमर उजाला ने गांव का दौरा किया तो पाया कि को-आपरेटिव सोसायटी के नजदीक करीब दस पेड़ों पर 4500 साइबेरियन बगुले बैठे हुए थे। बगुलों को उड़ाने के लिए लोग पटाखे चला रहे थे और हवाई फायरिंग कर रहे थे।
इस मौके पर गांव के गुरसेवक सिंह ने बताया कि प्रवासी पक्षियों द्वारा फैलाई जा रही गंदगी से लोगों का जीना दूभर हो चुका है। इस गंदगी से बच्चों को कई तरह की बीमारियां लग रही हैं। साइबेरियन बगुलों को भगाने के लिए घरों के बाहर पेड़ों पर पीपे लगाए गए हैं। उनको जोर- जोर से बजाने पर बगुले उड़ जाते हैं। लेकिन थोड़ी देर बाद ही वे दोबारा पेड़ पर आकर बैठ जाते हैं। इन पेड़ों पर बगुलों ने अपने आलने भी बना रखे हैं।
को-आपरेटिव सोसायटी के कर्मचारी हरप्रीत गोयल ने बताया कि उसकी आफिस के बाहर के पेड़ भी कटवा दिए गए ताकि वे यहां पर आकर गंदगी न फैलाएं। सुखबिंद्र कौर ने कहा कि अगर साइबेरियन बगुलों को भगाने के लिए सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया तो ग्रामीणों को घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
अंडों से फैल जाती है घर में गंदगी
गृहिणी सुखपाल कौर ने बताया कि वह जब भी खाना बना रही होती है, उसी दौरान ये पक्षी घर में आकर अंडे दे देते हैं। ऊपर से गिरने के कारण अंडे टूटने से सारे घर में गंदगी फैल जाती है और परिवार का खाना दूभर हो जाता है। उन्होंने बताया कि इन पक्षियाें के द्वारा फै लाई जा रही गंदगी व बदबू से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं।
पेड़ों को काटना पड़ा
बलबिंद्र सिंह ने बताया कि प्रवासी पक्षियों को पेड़ों से उड़ाने के लिए कई पेड़ भी काटने पडे़ है।
सुझाव देकर पशुपालन विभाग ने पल्ला झाड़ा
गांव की पंचायत ने डीसी बठिंडा को 27 जून को पत्र लिखकर इन पक्षियों से मुक्ति दिलाने की मांग की थी। डीसी ने पशु पालन विभाग को कार्रवाई करने का आदेश दिया। जबकि पशु पालन विभाग के डिप्टी डायेरक्टर प्रदीप बांसल ने गांव वासियाें को सुझाव दिया कि वे घराें में लगे पेड़ों की टहनियों को कटवा दें । उन्होंने डीसी को पत्र लिखकर बताया कि ये पक्षी वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत आते हैं। इन पर वही विभाग कार्रवाई कर सकती है।
छह माह रहते हैं प्रवासी पक्षी
पशु पालन विभाग के डिप्टी डायेरक्टर प्रदीप बांसल ने बताया कि ये प्रवासी पक्षी अप्रैल माह में भारत आते हैं और सिंतबर में वापस साईबेरिया लौट जाते हैं। उनके अनुसार भारत में ये पक्षी अंडे देने के लिए आते हैं।
वन विभाग को कोई सूचना नहीं: डीएफओ
इस संबंध में पूछने पर जिला जंगलात अधिकारी के कन्नन ने कहा कि प्रवासी पक्षियाें के बारे में उनके पास कोई रिपोर्ट नहीं आई है और न ही कोई सूचना मिली है कि गांव पथराला में साइबेरियन पक्षी आए हैं । डीसी का पत्र मिलने पर ही वह कोई कार्रवाई कर सकेंगे।
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