शांति-व्यवस्था के लिए खतरा हैं एसजीपीसी परिसर में बैठे प्रदर्शनकारी : लौंगोवाल

Punjab Bureauपंजाब ब्‍यूरो Updated Sun, 25 Oct 2020 05:38 PM IST
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने चेतावनी दी है कि कि यदि एसजीपीसी परिसर में हथियारों के साथ बैठे सतिकार कमेटी व अन्य सिख संगठनों को न हटाया गया तो शांति-व्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
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रविवार दोपहर एसजीपीसी परिसर स्थित तेजा सिंह समुंद्री हॉल में मीडिया के साथ बातचीत में लौंगोवाल ने आरोप लगाया कि सतिकार कमेटी का मुखिया सुखजीत खोसा श्री हरमंदिर साहिब की पवित्र परिक्रमा में घूम रहा है, वह किसी भी समय श्रद्धालु या एसजीपीसी कर्मचारी पर हमला कर सकता है। यदि ऐसा हुआ तो उसकी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी। लौंगोवाल ने कहा कि एसजीपीसी अपनी स्थापना की शताब्दी मना रही है। पंथ विरोधी कुछ शक्तियां सिखों की इस महान संस्था को विभाजित करने की साजिश रच रही हैं। सरकार भी इसमें शामिल है। शनिवार को हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए लौंगोवाल ने कहा कि शनिवार को सतिकार कमेटी व सिख संगठनों ने एसजीपीसी कर्मचारियों पर जानलेवा हमला किया। एसजीपीसी के सचिव सुखदेव सिंह भूराकोना की गाड़ी को तोड़ा गया। उसके ड्राइवर पर तलवारों से वार किया गया।
उन्होंने कहा कि एसजीपीसी और सचखंड परिसर धरना-प्रदर्शन का स्थान नहीं है। यह आध्यात्मिकता के केंद्र हैं। सिख संगठनों के साथ एसजीपीसी के कई सीनियर पदाधिकारियों ने बैठकें की। बैठक में वह धरना खत्म करने का विश्वास दिलाते, लेकिन बाहर जाकर अपने वादे से पीछे हट जाते थे। इसके बावजूद एसजीपीसी ने संगठनों को पूरा सहयोग दिया लेकिन खोसा ने सचखंड की मर्यादाओं में दखल देना शुरू कर दिया था। गुरुद्वारा मंजी साहिब दीवान हॉल में कथा में खलल डाला गया। 20 दिन पहले भी तेजा सिंह समुंद्री हाल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया गया था। शनिवार दोपहर को फिर वही हरकत की गई। मुख्य गेट के साथ छोटे गेट के बाहर खुद खोसा बैठ गया। जब एसजीपीसी कर्मचारी लंगर छकने बाहर जाने लगे, तो उसने पहले गालियां निकाली, बाद में अपने साथियों के साथ तलवारें लहरानी शुरू कर दी। इसी बात को लेकर टकराव पैदा हो गया।
सरकार की नीयत टकराव करवाने की है
लौंगोवाल ने कहा कि एसजीपीसी परिसर में हथियारों के साथ बैठे इन संगठनों के बारे में कई बार पुलिस व जिला प्रशासन के अलावा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी पत्र लिखे गए। पत्र में सरकार व प्रशासन को बार-बार चेताया गया कि किसी भी समय परिसर में टकराव हो सकता है लेकिन सरकार ने इन पत्रों को गंभीरता से नहीं लिया। इससे सरकार की नीयत का पता चलता है। सरकार एसजीपीसी और संगठनों के बीच टकराव करवाना चाहती थी।

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