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मंत्री बाजवा बोले- सचखंड से नगर कीर्तन के प्रसारण के अधिकार सभी टीवी चैनलों को दिए जाएं

अमर उजाला नेटवर्क, अमृतसर(पंजाब) Updated Sat, 15 Feb 2020 01:08 PM IST
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मेमोरेंडम देते पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री
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हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करवाकर एक नया विवाद छेड़ने वाली पंजाब सरकार के मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने नई बात शुरू कर दी है। उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को ज्ञापन सौंप कर सचखंड श्री हरमंदिर साहिब से होने वाले गुरबाणी के प्रसारण पर एक निजी चैनल के एकाधिकार को खत्म करने की मांग की है।
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मंत्री बाजवा ने जत्थेदार अकाल तख्त से मांग की है की वह इस संबंध में एसजीपीसी को निर्देश जारी करें। गुरबाणी कोई सांसारिक पदार्थ नहीं है, जिसे कुछ टकों (राशि) के बदले किसी निजी टीवी चैनल को बेचा जा सके। गुरबाणी पूरी मानवता के कल्याण का संदेश देती है, यह संदेश दुनिया में पहुंचे, इसकी जिम्मेदारी एसजीपीसी की है।

जत्थेदार श्री अकाल तख्त को दिए ज्ञापन में बाजवा ने कहा कि एसजीपीसी ने गुरबाणी को बीते दो दशकों से एक सीमित प्रसारण के घेरे में बांध दिया है। बादल परिवार की मालिकी वाले चैनल को कुछ राशि के बदले सचखंड से होने वाले गुरबाणी के प्रसारण को देना उचित नहीं है। एसजीपीसी कोई व्यापारिक संस्थान नहीं है। एसजीपीसी हर उस रेडियो व टीवी चैनल को फ्री में गुरबाणी के प्रसारण का अधिकार उपलब्ध करवाए जो गुरु मर्यादा के भीतर इसका प्रसारण करना चाहते है।

बाजवा ने अपने ज्ञापन में गुरबाणी के प्रसारण को पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा साहिब से जोड़ते हुए कहा कि जिस प्रकार सिख इन गुरुद्वारा साहिबान के दर्शनों की इच्छा रखता है, इसी तरह संगत श्री हरमंदिर साहिब से हर समय खुले प्रसारण की इच्छा रखती है। 1982 में श्री अकाल तख्त साहिब से जितने मोर्चे लगते रहे हैं, उनकी सबसे बड़ी मांग श्री हरमंदिर साहिब के कीर्तन के प्रसारण की रही है। कीर्तन प्रसारण की आज्ञा संघर्ष के बाद मिली है, इसलिए इसको एक टीवी चैनल तक सीमित करना सरासर गलत है।

बाजवा ने इस ज्ञापन में श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर पंजाब विधान सभा द्वारा पारित उस प्रस्ताव का भी जिक्र किया, जिसमें कहा था कि सचखंड से गुरबाणी को सभी टीवी चैनलों से प्रसारित किया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव पर शिअद के विधायकों ने भी सहमति दी थी। पंजाब विधान सभा द्वारा पारित इस प्रस्ताव पर अमल करने के लिए पंजाब सरकार ने 14 नवंबर 2019 को श्री अकाल तख्त साहिब को एक पत्र व प्रस्ताव की कॉपी भी भेजी थी।

बाजवा ने कहा की एसजीपीसी पर कब्जा जमाने वाले शिअद ने 1996 व 2004 के एसजीपीसी चुनाव के दौरान सिख संगत के साथ वादा किया था कि गुरबाणी के सीधे प्रसारण के लिए एसजीपीसी अपना टीवी चैनल स्थापित करेगी। पर इस कभी भी अमल न कर वर्तमान प्रबंधकों ने संगत के साथ विश्वासघात किया है। एसजीपीसी गुरबाणी घर-घर पहुंचाने के मामले में खुद बड़ा रोड़ा बन गई है।

मीडिया से बातचीत करते हुए बाजवा ने कहा कि जत्थेदार अकाल तख्त ने उनकी इस मांग को ध्यान से सुना। उन्होंने भरोसा दिया है कि वह इस संबंध में एसजीपीसी के प्रधान गोबिंद सिंह लौंगोवाल के साथ बातचीत कर मसले का हल निकालेंगे। बाजवा के साथ सुखजीत सिंह लोहगढ़, भगवंत पाल सिंह सच्चर, अमरीक सिंह शाहपुर व सुरजीत सिंह आदि मौजूद थे।
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