छात्र खुदकुशी मामले में साथी को कैद

Amritsar Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
अमृतसर। नौ साल पहले गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में एलएलबी अंतिम वर्ष के छात्र सौरव महाजन की खुदकुशी मामले में अदालत ने उसके सहपाठी हरविंदर सिंह ऊर्फ मोंटू को चार साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सौरव महाजन पर मोबाइल चोरी का आरोप लगाया गया था और उसको लेकर उसे काफी तंग किया गया था। इससे परेशान होकर सौरव ने यूनिवर्सिटी से घर जाते वक्त कत्थूनंगल रेलवे स्टेशन पर डीएमयू ट्रेन के नीचे आ कर खुदकुशी कर ली थी। सौरव महाजन और हरविंदर सिंह ऊर्फ मोंटू एक होस्टल में रहते थे।
मामला अक्तूबर 2003 का है। गुरदासपुर निवासी सौरव महाजन पुत्र विजय महाजन गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में कानून विभाग में एलएलबी फाइनल ईयर का छात्र था। उसके किसी सहपाठी का मोबाइल चोरी हो गया था और उस पर की गई कॉल के आधार पर करीब 30 हजार रुपये का बिल आ गया था। बिल की राशि का भुगतान के संबंधित छात्र दोस्त रुपयों का इंतजाम नहीं सके। इस दौरान कुछ छात्रों ने एक योजना के तहत सौरव महाजन पर मोबाइल चोरी करने के झूठे आरोप लगाने की धमकी देते हुए उससे बिल की राशि मांगनी शुरू कर दी थी। रुपये न मिलने पर यूनिवर्सिटी में सौरव महाजन के खिलाफ ही मोबाइल चोरी करने की शिकायत कर दी।
इस पर सौरव महाजन के पिता विजय महाजन, चाचा निर्मल महाजन 13 अक्तूबर 2003 को यूनिवर्सिटी के कानून विभाग के प्रमुख प्रोफेसर एम.डी. सिंह से मिलने पहुंचे, तो उन्होनें सभी छात्रों की उपस्थिति में ही नहीं, बल्कि पिता व चाचा के सामने भी बहुत जलील करना शुरू कर दिया था। इससे तंग आकर सौरव महाजन ने बाद में आत्महत्या कर ली।

1यहां तक कह दिया था कि वह यूनिवसिर्टी में काला कोट पहनने के लिए आया है, लेकिन वे उसका मुंह काला करने की बातें करते हुए उसे काफी जलील किया था। जिसके कारण सौरव महाजन अपनी इस बे-ईज्जती को बर्दाशत नहीं कर पा रहा था। यही कारण था कि 16-10-2003 को जब वह यूनिवसिर्टी से वापिस अपने घर गुरदासपुर जा रहा था, तो रास्ते में उसने डीएमयू ट्रेन के नीचे आकर अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर ली थी। इससे पहले उसने खुद को निर्दोष बताते हुए सूसाइड नोट भी लिखा था। जिसमें उसने यूनिवसिर्टी के तत्कालीन सिक्यिोरिटी अफसर एस.एस. छीनां और कानून विभाग के प्रमुख प्रोफैसर एम.डी. सिंह को एड्रैस करते हुए बार-बार लिखा था कि उस पर झूठे आरोप लगा कर उसे जलील किया गया है। इस मोबाइल कांड को लेकर उसने एलएल.बी. पार्ट-2 के तत्कालीन छात्र हरमिन्द्र सिंह ऊर्फ मिंटू तथा कुछ अन्य छात्रों को ही कसूरवार बताया था।

एमडी सिंह की हो चुकी है मौत और
छीनां को सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया था आरोपमुक्त
हालांकि पुलिस ने इस मामले में जीएनडीयू के कानून विभाग के प्रमुख प्रोफैसर एम.डी.सिंह के साथ साथ यूनिवसिर्टी के तत्कालीन सिक्यिोरिटी अफसर एसएस छीनां को भी कथित आरोपियों के तौर पर नामजद किया था, लेकिन मामले की सुनवाई के चलते जहां प्रोफैसर एम.डी. सिंह की मौत हो गई थी, वहीं हाईकोर्ट से कोई राहत न मिलने पर सिक्यिोरिटी अफसर एस.एस. छीनां को सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाना पड़ा था। छीनां ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज करने का अनुरोध किया था। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने छीनां की पटीशन को स्वीकार करते हुए उसे इस मामले में आरोपमुक्त कर दिया हुआ था। इस मामले में एकमात्र आरोपी (उस समय एलएल.बी. पार्ट-2 के छात्र) हरविन्द्र सिंह ऊर्फ मोंटू निवासी मजीठा रोड के खिलाफ ही सुनवाई चल रही थी।

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