सरबजीत की रिहाई में राजनीति बाधा: बर्नी

Amritsar Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
अमृतसर। पाकिस्तान के पूर्व मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी ने कहा कि सरबजीत के नाम पर दोनों देशों में हो रही राजनीति ही उसकी रिहाई में सब बड़ी बाधा बन गई है। वह भारत दौरे के दौरान शनिवार को मीडिया के साथ बातचीत कर रहे थे।
अंसार बर्नी ने बताया कि पाकिस्तान की विभिन्न जेलों में 60 हजार से अधिक कैदी बंद हैं। उनमें 7500 कैदी ऐसे हैं जिनको मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। इनमें से 65 प्रतिशत सजा-ए- मौत के कैदी पूरी तरह बेगुनाह हैं। 62 कैदी ऐसे हैं जिनकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला जा चुका है। इनमें कई कैदी ऐसे हैं जिन्होंने उम्र कैद की 14 वर्ष की सजा भी पूरी कर ली है। यहां तक कि वह 20 से 30 साल की कैद काट चुके हैं फिर भी पाकिस्तान की सरकार उनकों रिहा नहीं कर रही है। सरबजीत भी उनमें से एक है जो 22 वर्षों की कैद पूरी कर चुका है।
पाक के पूर्व मंत्री ने कहा कि सरबजीत की रिहाई के लिए अंसार बर्नी ट्रस्ट लड़ाई अपने तौर पर लड़ रहा है। सर्बजीत को किसी भी कीमत पर पाकिस्तान में फांसी नहीं होने दी जाएगी। परंतु कुछ लोग गलत ढंग से केस पेश कर रहे हैं जिस कारण उसकी रिहाई में बार-बार बाधा आ जा रही है। अब तक सरबजीत की रहम की अपील को सभी अदालतें और राष्ट्रपति भी रद कर चुके हैं। इस अवसर पर उनके साथ अखिल भारतीय मानवाधिकार संगठन के महामंत्री हवा सिंह तंवर और अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे।
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बर्नी से मिला सैनिक का बेटा
1971 की भारत पाक लड़ाई के दौरान लापता सैनिक रामदास का बेटा शिव कुमार अंसार बर्नी से अपने पिता की तलाश के लिए पहचान संबंधी दस्तावेज लेकर मिला। उसने बर्नी को बताया कि उसके पिता जिंदा हैं और वह या तो पाकिस्तान की जेल में हैं या फिर ओमान की जेल में बंद हैं। बर्नी ने आश्वासन दिया कि वह रामदास की तलाश करवाएंगे।

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