जरनैल सिंह भंडाल दोबारा सिख पंथ में शामिल

Amritsar Updated Tue, 02 Oct 2012 12:00 PM IST
अमृतसर। वर्ष 1998 में श्री अकाल तख्त साहिब के तत्कालीन जत्थेदार भाई रंजीत सिंह की ओर से एक हुक्मनामा जारी करके सिख पंथ में से निकाले गए कनाडा निवासी जरनैल सिंह भंडाल को सोमवार को दोबारा सिख पंथ में शामिल कर लिया गया। श्री अकाल तख्त साहिब पर हुई पंच सिंह साहिबान की बैठक में एक गुप्त समझौते के तहत भंडाल को एक दिखावा योग सजा लगा कर पंथ में शामिल होने के आदेश जारी कर दिए हैं। भंडाल को श्री अकाल तख्त साहिब के तत्कालीन जत्थेदार ने इस लिए पंथ से निकाल दिया था क्यों कि भंडाल ने कनाडा के अंदर पंथ मर्यादा के खिलाफ जाकर लंगर छकने की प्रथा पंगत में बैठने की जगह कुर्सियों पर बैठ कर छकने की शुरू कर दी थी।
पंच सिंह साहिबान ने एक आदेश जारी करके भंडाल को श्री दरबार साहिब स्थित गुरु रामदास लंगर में एक घंटा बर्तन, जोड़े साफ करने और चार रविवार कनाडा के किसी गुरुद्वारा साहिब में इसी सेवा को दोहराने के आदेश भी दिए हैं।
श्री अकाल तख्त साहिब के मौजूदा जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने दावा किया कि 14 सितंबर 2012 को जरनैल सिंह भंडाल खुद श्री अकाल तख्त साहिब पर हाजिर हुए थे और पंथ में उसे दोबारा शामिल किये जाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। इस को मुख्य रख कर पंच सिंह साहिबान ने भंडाल के मामले पर विचार करते हुए उसे तनख्वाह लगा दी है।
उल्लेखनीय है कि जब जत्थेदार अकाल तख्त भंडाल को तनख्वाह सुनाने लगे तो भंडाल वहां मौजूद भी नहीं थे। दस मिनट तक वह भंडाल का इंतजार करते रहे। जब भंडाल श्री अकाल तख्त पर पहुंचे तो वह धार्मिक सजा को खड़े होकर सुनने के लिए भी तैयार नहीं थे। जत्थेदार के निजी सहायक ने भंडाल को सजा सुनने के लिए तैयार भर तैयार रहने के लिए मानसिक तौर पर प्रेरित भी किया।
बैठक में पांच सिंह साहिबान ने नवंबर 1984 के कत्लेआम के आरोपियों को सजाएं देने के लिए वकील एचएच फूलका की ओर से तैयार किये गए प्रोग्राम को मान्यता भी प्रदान कर दी है। उन्होंने कहा कि फुलका की ओर से जो प्रदर्शनी मारे गए सिखों की याद में अमृतसर से लेकर दिल्ली तक लगानी है उसको सिख कौम पूरा सहयोग दे।
गुरुघरों के प्रबंधों को चलाने के लिए बनाए गए अलग-अलग ट्रस्टों को भंग करने के भी आदेश दिए गए। कहा गया तो ट्रस्ट नियमों के अनुसार चुनाव करवा कर सेवा करते है। उन्हें ही मान्यता होगी। अमर शहीद बाबा दीप सिंह की शहीदी दिवस की तिथि को बदलते हुए आदेश दिए गए कि सिख कौम 18 नवंबर को यह शहीदी दिन आयोजित करे। उन्होंने कहा कि दीवाली और शहीदी दिन नजदीक होने के कारण यह फैसला लिया गया है। एक अन्य फैसला लेकर निजी प्रकाशकों को हिदायतें जारी की गई हैं कि कोई भी प्रकाशक किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर गुटके और पोथियां प्रकाशित नहीं करेगा।

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