कश्मीर में असुरक्षित महसूस कर रहे सिख

Amritsar Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
अमृतसर। जम्मू -कश्मीर में रहने वाले सिख वहां के मौजूदा हालात के कारण असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। रोजगार के अवसरों में कमी होने के कारण उनकी हालत दयनीय होती जा रही है और आर्थिक संकट के कारण वे वहां से दूसरे राज्यों में जाने की तैयारी में हैं।
जम्मू -कश्मीर में रहने वाले सिखों को आ रही मुश्किलों की शिकायतें मिलने के बाद एसजीपीसी ने कमेटी के सचिव को निर्देश दिया था कि वह एक दल के साथ कश्मीर जाएं और वहां के सिख निवासियों के समक्ष आ रही दिक्कतों की जमीनी हकीकत का आकलन कर एक रिपोर्ट दें। दिलमेघ सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले जम्मू कश्मीर जाकर उन्होंने वहां रहने वाले सिखों के बातचीत की है। एसजीपीसी के प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ को सौंपी रिपोर्ट में दिलमेघ ने बताया है कि सिखों को जम्मू कश्मीर में कारोबार आदि चलाने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने शिकायत की कि पहले सिखों को विभिन्न शिक्षण संस्थानों में पंजाबी अध्यापक की नौकरी मिल जाती थी। परंतु अब स्थिति अच्छी नहीं है। बताया गया है कि वर्ष 1988 में सात कालेजों में पंजाबी भाषा के अध्यापकों के 7 पद थे, जबकि वर्ष 2011 में कालेजों की संख्या बढ़कर 25 हो गई जबकि पोस्टें सिर्फ दो रह गई हैं। दिलमेघ ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि जम्मू कश्मीर सरकार सिख विरोधी फैसले कर रही है।
एसजीपीसी के सचिव ने कहा कि जम्मू कश्मीर सरकार जब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं करती, तब तक सिखों को राज्य में अल्पसंख्यक होने का स्टेटस नहीं मिल सकता। जम्मू कश्मीर में कृषि, नौकरी, ट्रांसपोर्ट हाथों से निकल जाने के कारण सिखों की आर्थिक हालत दयनीय होती जा रही है।
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पीएम के समक्ष मामला उठाएं
रिपोर्ट में कहा गया कि केंद्र सरकार और जम्मू कश्मीर सरकार को सिखों की इस हालत की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। जम्मू कश्मीर के सिखों की हालात को लेकर एसजीपीसी को सारा मामला प्रधानमंत्री के समाने रखना चाहिए।

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