धर्मू चक्क का जर्रा-जर्रा शोक में

Amritsar Updated Fri, 13 Jul 2012 12:00 PM IST
धर्मू चक्क (अमृतसर)। पंजाब ने अपनी मिट्टी का सपूत रुस्तम-ए-हिंद दारा सिंह खो दिया है। गांव धर्मू चक्क का जर्रा-जर्रा दारा सिंह को सजदा कर रहा है। धर्मू चक्क के नाम को दुनिया के कोने कोने तक लेकर जाने वाला शेर आज इस दुनिया से विदा हो गया, लेकिन उसकी यादें आज धर्मू चक्क के बच्चे बच्चे के जहन में सदा के लिए अमर हो गई हैं।
पंजाब व भारत के नाम का दुनिया भर में झंडा बुलंद करने वाले दारा सिंह के निधन पर धर्मू चक्क के हर बाशिंदे की आंखें नम हैं। निधन की सूचना मिलते ही दारा के भतीजे बलजीत सिंह का परिवार मुंबई रवाना हो गया है। दारा के पैतृक घर को ताला लगा हुआ है। घर के पास ही बरगद और पीपल के पेड़ के नीचे बनी चौपाल पर गांव की महिलाएं, पुरुष व बच्चे इकट्ठा होकर शोक व्यक्त कर रहे हैं। दारा सिंह के दोस्त जगीर सिंह और निकटवर्ती रिश्तेदार दरबारा सिंह की आंखों से पानी तब से बहे जा रहा है जब से उन्होंने दारा की मृत्यु की खबर सुनी है।
सारा गांव दारा सिंह की आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना में जुटा हुआ है। बहुत से युवा आज अपने गांव के शेर के चले जाने की सूचना सुनकर अपने काम पर नहीं गए। गांव में कुछ ही दुकानें हैं जिनको भी गांव वासियों ने अपने हीरो की मौत के शोक में बंद रखा है। एलिमेंटरी स्कूल में भी बच्चों की हाजिरी कम है। गांव में चारों ओर शोक की लहर है।

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मेरी सेहत की दुआ करने वाली ही चला गया : जगीर सिंह
दारा के दोस्त जगीर सिंह की तो मानो आवाज ही बंद हो गई है। रोता हुआ जगीर सिंह कुछ बोल नहीं रहा। बस इशारों से ही अपने दिल का दर्द बया कर रहा है। आंखों से बहते नीर को कुछ पल के लिए अपने कंधे पर रखे हुए परने से पाेंछते हुए जगीर ने कहा कि था कि जब दारा गांव में स्टेडियम का शुभारंभ करने के लिए आया था तो मुझे कहता था कि तू बहुत कमजोर हो गया है। कुछ खायापीया कर। डाक्टर से दवाई लेता रह और हर 15 दिन में चेकअप करवाया कर। कहीं यह न हो कि अगली बार जब मैं गांव आऊं तो दूसरे दोस्तों की तरह मुझे मेरा जगीरा भी गांव में न मिले। जैसे मेरे अन्य साथी एक एक करके मुझ से दूर चले गए उसे तरह मैं जगीरा को अपने से दूर नहीं होना देना चाहता। जगीर सिंह बोलता है कि मुझे क्या पता था कि मेरी सेहत की दुआ करने वाला मुझे से पहले ही इस संसार को छोड़ जाएगा।

ऐसा लगा जैसी आत्मा ही चली गई : दरबारा सिंह
दारा के साथ विभिन्न कुश्तियों के रिंग में साथ रहने वाले दरबारा सिंह की आंखों का पानी तो जैसे दारा की मृत्यु की खबर सुन कर सूख ही गया है। उसे गले से आवाज ही नहीं निकल रही है। दरबारा कहता है कि वह दारा की अंतिम शव यात्रा में शामिल होना चाहता है, लेकिन हार्ट का मरीज होने के कारण मुझे डाक्टरों ने आने जाने से मना किया है। मैं सिर्फ गांव के गुरुद्वारा साहिब में ही बैठ अपने भाई व जिगरी दोस्त की आत्मा की शांति के लिए दुआ करूंगा। आज मुझे लग रहा है कि मेरी आत्मा ही निकल कर कहीं चली गई है। दारा की मौत की खबर ने धर्मू चक्क के हर निवासी को गहरे शोक में धकेल दिया है। लोगों ने दारा की याद में गुरुद्वारा साहिब में लंगर की व्यवस्था भी की हुई है।

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