सरबजीत के परिवार ने लड़ी 20 साल की लंबी लड़ाई

Amritsar Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
अमृतसर। पाकिस्तान की जेल में पिछले 20 वर्षों से कैद मौत की सजा का इंतजार कर रहे सरबजीत सिंह को पाक राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की ओर से रिहा करने के फैसले से सरबजीत के गांव भिखीविंड (तरनतारन) में खुशी की लहर दौड़ गई। सरबजीत सिंह पर आरोप था कि पाकिस्तान में हुए चार बड़े बम धमाकों में उसका हाथ था। इसके लिए उसे पाकिस्तान की अदालतों ने मौत की सजा सुनाई थी। वर्ष 1990 में पाकिस्तान के लाहौर और मुलतान में हुए सीरियल बम धमाकों में 14 लोगों के मारे जाने की सूचना थी। सरबजीत को पाकिस्तान में गिरफतार किया गया था। उसे वर्ष 2008 में मौत की सजा सुनाई गई थी।
लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद सरबजीत की आयु इस समय 49 वर्ष है। सरबजीत की रिहाई के लिए भारत सरकार के साथ साथ उसके परिवार के लोगों ने भी लंबी लड़ाई लड़ी थी। सरबजीत के परिवार का कहना था कि वह गलती से सीमा पार करके पाकिस्तान चला गया था। जहां उस पर बम धमाकों का केस डालकर जेल भेज दिया गया। असल में सरबजीत इस तरह की किसी भी घटना में शामिल नहंी था।
सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने भाई की रिहाई के लिए लंबी लड़ाई लड़ने के साथ साथ विभिन्न धार्मिक स्थलों पर दुआएं भी की थीं। पाकिस्तान में भी सरबजीत की रिहाई के लिए विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने आवाज उठाई थी। यहां तक के दलबीर कौर अपने भाई सरबजीत से मिलने 2008 में पाकिस्तान भी गई थीं। वहां उन्होंने विभिन्न मानवाधिकर संगठनों के नेताओं के साथ साथ राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के साथ भी मुलाकात करके सरबजीत की रिहाई के लिए अपीलें की थीं।
दलबीर कौर पाक में उन परिवारों के वारिसों से भी मिली थीं जिनके सदस्य मुलतान और लाहौर बम धमाकों में मारे गए थे। इस दौरान दलबीर कौर ने अपने भाई को निर्दोष बताया था। यहां तक कि सरबजीत उर्फ मंजीत के नाम भेद का खुलासा करके असली आरोपी मंजीत रत्तू के संबंध में भी पाकिस्तानी अदालतों के समाने खुलासा किया था कि बम धमाकों में उसका भाई नहीं बल्कि एक अन्य व्यक्ति मंजीत रत्तू शामिल था। जो इस समय विभिन्न मामलों में भारतीय जेलों में बंद है।

बेटियों को चिट्ठियां लिखता था सरबजीत
समय समय पर यह चरचा भी आती रही कि सरबजीत सिंह जेल में कविताएं और चिट्ठियां अपनी बेटियों पूनम और स्वपनदीप को लिखता रहा है। वह अपनी पत्नी सुखप्रीत कौर को याद करके बहुत रोता है। सरबजीत को रिहा करवाने के लिए कानूनी लड़ाई में पाकिस्तान के वकील ओवैश शेख, मानवाधिकार कार्यकर्ता अंसार बर्नी और वकील आसमां जहांगीर की ओर से भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज बुलंद की। सरबजीत के परिवार ने भारत सरकार पर भी उसे पाकिस्तान से रिहा करवाने के लिए दबाव बनाने के लिए दिल्ली में कई बार प्रदर्शन किए। मंत्रियों, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक भी सरबजीत की रिहाई के लिए आवाज पहुंचाई।
सरबजीत को रिहा करवाने के लिए भारत सराकर पर पाकिस्तान सरकार के साथ बातचीत करने के लिए दबाव बनाने को सरबजीत का परिवार उच्च न्यायालय और एससी-एसटी कमीशन के पास भी गया था। पाकिस्तान की अलग अलग अदालतों में सरबजीत की बहन अपने वकील के माध्यम से दया की याचिका दायर करती रहीं। सरबजीत तरनतारन के भिखीविंड गांव में एक साधारण किसान परिवार में पला बढ़ा और खेतीबाड़ी करता था। इसी दौरान एक दिन वह गलती से सीमा पर हो गया और पाकिस्तान रेंजर्स ने उसे पकड़ लिया।

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