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एसजीपीसी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 1100 कमरों का यात्री निवास का करेगा निर्माण

Panchkula bureauपंचकुला ब्‍यूरो Updated Mon, 22 Apr 2019 10:43 PM IST
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संगत के लिए बनने वाली सराय का नींव पत्थर रखा
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अकाली मार्केट में बनाने वाले इस यात्री निवास का नाम ‘माता तृप्ता जी निवास’ होगा
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर। विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने के लिए देश-विदेश से रोजाना डेढ़ से दो लाख लोग पहुंच रहे हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को ठहरने की बेहतर व विशेष सुविधाएं देने के लिए एक नई सराय का निर्माण करेगी। ये सराय श्री हरमंदिर साहिब के पापड़ा वाले बाजार के प्रवेश व निकास द्वार की तरफ जाते रास्ते से मात्र 300 गज की दूरी पर स्थित अकाली मार्केट में बनेगी। पूरा क्षेत्र एसजीपीसी की की मलकीयत है। इस सराय के निर्माण का नींव पत्थर एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने सोमवार को रखा। श्री गुरु नानक देव जी के 550वे प्रकाश पर्व को समर्पित इस सराए का नाम ‘माता तृप्ता जी निवास’ रखा गया है। नींव पत्थर कार्यक्रम से पहले श्री हरमंदिर साहिब के के अरदासिये भाई सुल्तान सिंह ने शुभारंभ की अरदास की। संगत को संबोधित करते हुए लौंगोवाल ने कहा कि विश्व से संगत श्री हरमंदिर साहिब माथा टेकने के लिए पहुंच रही है। संगत की सुविधा के लिए एसजीपीसी एक नए यात्री निवास का निर्माण कर रही है। इसके निर्माण से गुरुघर आने वाले लोगों के ठहरने की दिक्कत दूर होगी। इस निवास में 1100 कमरे होंगे। 550-550 कमरों के दो ब्लॉक का निर्माण किया जाएगा। यात्री निवास में हर आधुनिक सुविधा उपलबध कराई जाएगी। इस अवसर पर एसजीपीसी सदस्य भाई मंजीत सिंह, भाई राम सिंह सुरजीत सिंह भिट्टेवड, भाई अजायब सिंह अभिलाषी व अन्य भी मौजूद थे।

सिख अजायब घर में दो पंथक शख्सियतों की फोटो स्थापित हुए
श्री दरबार साहिब परिसर में स्थित केंद्रीय सिख अजायब घर में दो प्रमुख शख्सियत संत ज्ञानी वरियाम सिंह धूरकोट व पंथ प्रसिद्ध कविशर ज्ञानी जोगा सिंह जोगी के फोटो स्थापित किए गए। दोनों शख्सियतों ने सिख धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन तस्वीरों से पर्दा हटाने की रस्म एसजीपीसी अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने निभाई। उन्होंने कहा के दोनों शख्सियतों के फोटो से सिखों की युवा पीढ़ी प्रेरणा लेगी। ज्ञानी वरियाम सिंह ने 55 वर्ष तक गुरमति विद्यालय में सेवा निभाते हुए सैकड़ों सिख नौजवानों को सिख धर्म के प्रचार के लिए तैयार किया। ज्ञानी जोगा सिंह ने 20 किताबें लिख कविशर प्रथा को आगे बढ़ाया।

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