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नवरात्रि विशेष: जानिए अष्टमी-नवमी की पूजा में क्या है हवन का महत्व

3 October 2022

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नवरात्रि में कुछ लोग दुर्गा अष्टमी तो कुछ महानवमी के दिन हवन करते हैं। इस बार शारदीय नवरात्रि में अष्टमी तिथि 02 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 47 मिनट से शुरू हो रही है, जो कि 3 अक्टूबर को शाम 04 बजकर 37 मिनट तक रहेगी। ऐसे में अष्टमी का व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा। 

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प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष कि पूर्णिमा तिथि को सिख धर्म के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव की जयंती मनाई जाती है। इस साल 8 नवंबर को गुरु नानक देव की जयंती मनाई जा रही है।

कार्तिक माह में तुलसी पूजन से कई तरह के सकारात्मक बदलाव आते हैं, भगवान नारायण की प्रिय तुलसी को देवी लक्ष्मी का ही रूप माना गया है इसलिए इसे घर में लगाना बेहद शुभ माना गया है। 

पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी माह में श्री हरि विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण किया था। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान-दान करने से पूरे माह की पूजा-पाठ करने के समान फल मिलता है। 

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को देव दिवाली का पर्व मनाया जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, देव दिवाली के दिन चंद्र ग्रहण लगने से इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
 

बैकुंठ चतुर्दशी कार्तिक पूर्णिमा से एक दिन पहले मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि का विशेष महत्व है।
 

छठ पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। छठ पर्व को कई नामों से जाना जाता है, जैसे डाला छठ, सूर्य षष्ठी और छठ पूजा के नाम से जाना जाता है।

हेलोवीन का त्यौहार हर साल अक्टूबर के आखिरी दिन यानि 31 अक्टूबर को मनाया जाता है | यह त्यौहार विदेशों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है | ये त्यौहार आजकल भारत में भी बहुत प्रसिद्ध होता जा रहा है | हेलोवीन का त्यौहार सबसे अधिक यूरोप, अमेरिका और इंग्लैंड के साथ साथ दुनिया के दूसरे बहुत से देशों में भी मनाया जाने लगा है | 
 

खरना पूजन के साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। खरना के दिन गुड़ की खीर, रोटी और केले का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

छठ पूजा में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, आपने देखा होगा इस पूजा के दौरान महिलाएं नाक तक सिंदूर लगाती हैं, इसका भी अपना एक महत्व है।

हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा का आयोजन किया जाता है। इस पर्व में 36 घंटे निर्जला व्रत रख सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है।

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