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जन्माष्टमी स्पेशल: आखिर कौन था कालनेमि जो बना कंस

19 August 2022

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कंस न ही तो एक राक्षस था, न ही कोई असुर या दानव, क्या आप जानते हैं कि कंस पिछले जन्म में क्या था? कंस की मृत्यु कैसे हुई थी? 

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नवरात्र के दूसरें दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं. साधक इस दिन अपने मन को मां के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली।
 

माना जाता है कि नवरात्र के ये नौ दिन देवी मां भक्तों के घर पर वास करती हैं। इस दौरान लोग नवरात्रि का उपवास करते हैं और देवी के नौ रूपों की आराधना करते हैं। नवरात्रि में भक्त माता के 9 स्वरूपों का श्रृंगार करते हैं। माता को प्रसन्न करने के लिए देवियों के प्रिय नौ रंगों को खुद भी धारण करते हैं। 

देवी दुर्गा को हिंदू धर्म में सबसे शक्तिशाली देवताओं में से एक कहा जाता है। उन्हें देवी या शक्ति के नाम से भी जाना जाता है जिसका हिंदी में अर्थ क्रमशः 'नारी' और 'शक्ति' होता है। संस्कृत में दुर्गा शब्द का अर्थ है 'एक किला' जो इस तथ्य का प्रतीक है कि देवी दुर्गा शक्ति और नारीत्व की प्रतीक हैं। अन्य समय में देवी दुर्गा को दुर्गाती नाशिनी कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'दुख को दूर करने वाली'। यह सब कहने का सार है कि देवी दुर्गा अपने उपासकों को शक्ति, धैर्य और ऐसे कई गुणों का आशीर्वाद देती हैं, लेकिन वह उन चीजों को भी नष्ट कर देती हैं जिन्हें नष्ट करने की आवश्यकता होती है, पेश है नवरात्र के शुभ अवसर पर दुर्गा स्तोत्र

इस वर्ष 26 सितंबर, सोमवार से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो रही है। नवरात्रि में 9 दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि शुरू होकर 5 अक्तूबर को दशहरा पर समापन होगा। 
 

नौ देवियों का त्योहार नवरात्रि... हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है 'नौ रातें', इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवां दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। 

देवी दुर्गा को हिंदू धर्म में सबसे शक्तिशाली देवताओं में से एक कहा जाता है। उन्हें देवी या शक्ति के नाम से भी जाना जाता है जिसका हिंदी में अर्थ क्रमशः 'नारी' और 'शक्ति' होता है। संस्कृत में दुर्गा शब्द का अर्थ है 'एक किला' जो इस तथ्य का प्रतीक है कि देवी दुर्गा शक्ति और नारीत्व की प्रतीक हैं। अन्य समय में देवी दुर्गा को दुर्गाती नाशिनी कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'दुख को दूर करने वाली'। यह सब कहने का सार है कि देवी दुर्गा अपने उपासकों को शक्ति, धैर्य और ऐसे कई गुणों का आशीर्वाद देती हैं, लेकिन वह उन चीजों को भी नष्ट कर देती हैं जिन्हें नष्ट करने की आवश्यकता होती है, पेश है नवरात्र के शुभ अवसर पर दुर्गा स्तोत्र

भगवान गणेश का अथर्वशीर्ष स्त्रोत का पाठ करने से भी फलदायक लाभ मिलता है। मान्यता है कि अथर्वशीर्ष स्त्रोत पाठ करने से व्यक्ति के दुखों का अंत हो जाता है। गणेशजी की मंत्रों जाप व्यक्ति को सर्व सिद्धि प्राप्त कराता है। 

गणपति के इस चमत्कारी मंत्र के जाप करने से आपकी  किस्मत चमक सकती है । मान्यता है कि इस मंत्र के जाप मात्र से  मनचाहा वरदान मिल जाएगा ।

भगवान गणेश को गजानन, बप्पा, विघ्नहर्ता या एकदंत के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर गणेश जी को एकदंत क्यों कहा जाता है, और कौन थे बप्पा के वाहन मूषकराज, सुनिए रोचक कथा

कंस न ही तो एक राक्षस था, न ही कोई असुर या दानव, क्या आप जानते हैं कि कंस पिछले जन्म में क्या था? कंस की मृत्यु कैसे हुई थी? 

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