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मनोरंजन दिनभर: सुनिए मनोरंजन जगत की आज की बड़ी खबरें

26 December 2021

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जानिए क्यों टेंशन में थे सलमान खान के फैंस। बचपन का कौन सी किस्सा बताकर सुनाकर इमोशलन हुए जैकी श्रॉफ औऱ मनोरंजन जगत की खबरें जानने के लिए सुनिए मनोरंजन दिनभर।

मनोरंजन दिनभर: सुनिए मनोरंजन जगत की आज की बड़ी खबरें

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3 इडियट्स की सफलता के बाद, निर्देशक राजकुमार हिरानी और लेखक अभिजीत जोशी ने अगली फिल्म के लिए काम शुरू किया। उन्होंने एक ऐसे किरदार के बारे में कहानी लिखी थी जो किसी दूसरे इंसान के दिमाग को पढ़कर उसे बेहतर बनाने की ताकत रखता है। दोनों ने कहानी लिखने में एक साल बिता दिया और जब कहानी पूरी हुई तो उन्हें पता चला कि उनकी कहानी 2010 में रिलीज हुई फिल्म इंसेप्शन से मिलती जुलती है। इंसेप्शन देखने के बाद हिरानी और जोशी समानताओं से हैरान रह गए। आखिरकार, उन्होंने फिल्म को खत्म करने का फैसला किया, फिर हिरानी और जोशी ने दूसरे एंगल से स्क्रिप्ट पर काम किया। फिल्म पीके को बनाने में पांच साल और इसे लिखने में तीन साल लगे। 
 

पंचायत सीजन 2 का नाम हर किसी की जुबान पर है. फुलेरा ग्राम पंचायत के सचिव जी, प्रधानजी, ऑफिस सहायक और उपप्रधान की अदाकारी ने दर्शकों को अपना मुरीद बना दिया है। तो आज बात करेंगे पंचायत वेब सीरीज की.पंचायत सीजन वन को बनाने की शुरुआत होती है 2019 में..2019 के अंत में द वायरल फीवर यानी टीवीएफ ने हॉस्टल डेज़ की सफलता के बाद एक नई वेब सीरीज बनाने का करार स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म अमेज़ॅन प्राइम वीडियो से किया। टीवीएफ के क्रिएटिव हेड समीर सक्सेना ने चंदन कुमार और दीपक कुमार मिश्रा को शो की पटकथा और सीरीज का निर्देशन करने के लिए चुना। मिश्रा ने पहले थिएटर शो और नाटक का निर्देशन कर चुके थे...एक पूरी वेब सीरीज निर्देशित करने का यह उनका पहला प्रयास था। मिश्रा ने क्लासिक दूरदर्शन शो मालगुडी डेज़, पोटली बाबा की, स्वामी और तेनाली रामा से प्रेरणा ली, और उनमें से एक को वर्तमान परिदृश्य से संबंधित बनाने का फैसला किया...चंदन और दीपक ने कई दिनों तक गांवों की रीसर्च की और आखिरकार उस स्क्रिप्ट का मसौदा तैयार किया, जिसमें एक इंजीनियरिंग स्नातक एक दूरदराज के गांव में कम वेतन वाली नौकरी में कर रहा होता है...पहले वेब सीरीज का शीर्षक एसडीओ साहब रखा गया लेकिन बाद में इसे पंचायत के नाम से रिलीज किया गया...

हिंदी सिनेमा में पर्दे पर जितनी रोचक कहानियां दिखती हैं, उतनी ही रोचक कहानियां पर्दे के पीछे की भी होती हैं। फिल्म की शूटिंग करते हुए, गाना कंपोज या फिर शूट करते हुए ऐसे कई किस्से बन जाते हैं, जो काफी दिलचस्प होते हैं। हिंदी सिनेमा में ऋषि कपूर एक चॉकलेटी और रोमांटिक हीरो वाली छवि रखते थे। उन्होंने अपने जीवन में प्रेमी से लेकर पिता तक कई किरदार निभाए और हर किरदार में वे जान डाल देते थे। उनकी फिल्म 'रफू चक्कर' की शूटिंग के दौरान एक बहुत ही मजेदार किस्सा हुआ था। दरअसल ऋषि कपूर लड़की के गेटअप में वॉशरूम में चले गए थे।

आज हम बात करेंगे 1993 में आई सुपरहिट फिल्म बाजीगर की. बाजीगर को निर्देशित किया था अब्बास मस्तान ने और मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे शाहरुख खान, काजोल, शिल्पा शेट्टी, राखी, दलीप ताहिल और जॉनी लीवर...सुरों से सजाया था अन्नु मलिक ने....सस्पेंस और थ्रिलर से भरपूर बाजीगर साल 1993 की चौथी सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म थी। इस फिल्म ने शाहरुख खान, काजोल और शिल्पा शेट्टी के करियर को एक नई दिशा दी...शिल्पा शेट्टी ने बाजीगर से बॉलीवुड में डेब्यू किया था और शाहरुख और काजोल की साथ में ये पहली फिल्म थी। जब फिल्म की शूटिंग शुरू हुई थी तो काजोल की उम्र 18 और शिल्पा शेट्टी की उम्र 17 साल थी...1992 में आई खिलाड़ी के बाद निर्देशक अब्बास मस्तान की ये दूसरी बड़ी हिट फिल्म थी...तो चलिए बताते हैं बाजीगर के दिलचस्प किस्से....

मजरूह सुल्तानपुरी एक उर्दू शायर, हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध गीतकार और आंदोलनकारी थे। उनका नाम 20वीं सदी के तरक्कीपसंद शायरों में गिना जाता है। उन्होंने तमाम हिन्दी फिल्मों के लिए गीत लिखे हैं, जो आज भी लोगों के जेहन में तरोताजा हैं। 1964 में फिल्म ‘दोस्ती’ के गीत 'चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे' के लिए मजरूह को फिल्मफेयर एवार्ड से नवाजा गया। इसके अलावा वे पहले ऐसे गीतकार थे, जिन्हें दादासाहब फाल्के मिला। मजरूह सुल्तानपुरी महान शायर ही नहीं पक्के देशभक्त भी थे। उन्होंने विदेशों में भी भारत को झुकने नहीं दिया। उनके जीवन का एक किस्सा भारत के प्रति उनके प्यार और देशभक्ति को दर्शाता है।  एक बार विदेश में मुशायरे के दौरान पाकिस्तानी शायर फैज अहमद फैज ने भारत की गरीबी का मजाक उड़ाया था। इस पर सुल्तानपुरी ने न सिर्फ फैज को मुशायरे के मंच से ही मुंहतोड़ जवाब दिया बल्कि भारत की गरिमा भी कायम रखी। 

आपने सदाबहार अभिनेता और अभिनेत्रियों के बारे में तो सुना होगा लेकिन हम आज बात करेंगे सदाबहार खलनायक की..एक ऐसा खलनायक जिसने परदे पर सबसे ज्यादा बार नारद मुनि का किरदार निभाया...जिसकी संवाद अदायगी से ही एक अलग तरह की मक्कारी झलकती थी...जी हां, हम बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा के मशहूर खलनायकों में शुमार रहे जीवन की...छरहरी काया, लंबे कद और डायलॉग बोलने के अपने खास अंदाज से जीवन ने हिंदी सिनेमा में ऐसी छाप छोड़ी कि नई पीढ़ी के कलाकार उनकी नकल करते नजर आते हैं...उनकी जुबान से निकलने वाले डायलॉग उनके चेहरे के हावभाव से होकर जब गुजरते थे तो देखने वाले सिर्फ नफरत की नजर से देखते थे...और यही वो कलाकारी थी जो उनके अभिनय की एक अलग पहचान बन गई।

पद्मावत संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित पीरियड ड्रामा रोमांटिक फिल्म है। मलिक मुहम्मद जायसी की कालजयी कविता पर आधारित इस फिल्म में दीपिका पादुकोण रानी पद्मावती, शाहिद कपूर महारावल रतन सिंह के किरदार में दिखाई दिए. साथ ही रणवीर सिंह ने सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी का दमदार किरदार निभाया है. तो चलिए शुरू करते हैं पद्मावत के बारे में दिलचस्प बातों का सिलसिला...रानी पद्मावत और अलाउद्दीन खिलजी पर फिल्म बनाने का विचार संजय लीला भंसाली को पहली बार उस वक्त आया था जब वो श्याम बेनेगल के धारावाहिक भारत एक खोज के असिस्टेंट संपादक के तौर पर काम कर रहे थे. इसी धारावाहिक में अलाउद्दीन खिलजी के रूप में ओम पुरी और रानी पद्मावती के बारे में एक एपिसोड था। भंसाली ने तय कर लिया कि अगर उन्हें कभी फिल्म बनाने का मौका मिला तो खिलजी और पद्मावती की कहानी पर फिल्म बनाना चाहेंगे। 

विशाल भारद्वाज निर्देशित ओंकारा विलियम शेक्सपियर के मशहूर नाटक ओथेलो पर आधारित है। फिल्म में अजय देवगन, करीना कपूर, सैफ अली खान, कोंकणा सेन शर्मा, विवेक ओबेरॉय और बिपाशा बसु मुख्य भूमिकाओं में नजर आए। निर्देशक विशाल भारद्वाज ने खुद फिल्म के लिए पूरा संगीत तैयार किया, जिसमें बैकग्राउंड स्कोर भी शामिल है और गीत गुलजार के हैं। फिल्म की पृष्ठभूमि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शहर मेरठ की है. लेकिन क्या आप जानते है कि लंगड़ा त्यागी के जिस किरदार से सैफ की एक अलग छवि दर्शकों को देखने को मिली वो किरदार एक बड़े अभिनेता ने ठुकरा दिया था...तो चलिए बताते हैं फिल्म ओंकारा से जुड़ी दिलचस्प बातें....ओंकारा शेक्सपियर ने नाटकों की सीरीज पर बनी विशाल भारद्वाज की दूसरी फिल्म है, जो 2003 की मकबूल से शुरू हुई और 2014 की हैदर के साथ पूरी हुई। ओंकारा के नायक यानी ओमी शुक्ला के किरदार के लिए विशाल की पहली पसंद अजय देवगन ही थे। विशाल इस फिल्म को आमिर खान के प्रॉडक्शन हाउस के तले बनाना चाहते थे। उन्होंने आमिर को पूरी कहानी सुनाई. आमिर को लंगड़ा त्यागी का किरदार बेहद पसंद आया और वो फिल्म करने के लिए राजी भी हो गए. लेकिन जब फिल्म पर विस्तार से चर्चा हुई तो कहानी और कुछ क्रिएटिव पार्ट्स पर विशाल और आमिर में मतभेद हो गए. 

दोस्तों आज बात करेंगे 6 फरवरी 1981 में रिलीज हुई ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म है क्रांति की. क्रांति का निर्माण और निर्देशन मनोज कुमार ने किया और कहानी-पटकथा सलीम-जावेद ने लिखी। मुख्य भूमिका में थे दिलीप कुमार, मनोज कुमार, शशि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, हेमा मालिनी, परवीन और प्रेम चोपड़ा। इस फिल्म में दिलीप कुमार ने पर्दे पर पांच साल बाद वापसी की थी. फिल्म जबरदस्त हिट रही थी. गीत लिखे थे संतोष आनंद ने और संगीत से सजाया था लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने...तो चलिए सुनाते हैं फिल्म क्रांति से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से.क्रांति उस समय की सबसे महंगी भारतीय फिल्मों में से एक थी और यह 1980 के दशक की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म भी थी। क्रांति भारत में अब तक देखी गई सबसे बड़ी देशभक्ति फिल्म है। रिलीज के समय शोले के बाद यह दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म थी। हालांकि, कमाई के मामले में क्रांति शोले से आगे रही...

मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस. 2003 में रिलीज हुई एक कॉमेडी ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन राजकुमार हिरानी ने किया और निर्माता हैं विधु विनोद चोपड़ा. फिल्म में संजय दत्त, सुनील दत्त, अरशद वारसी, जिमी शेरगिल, ग्रेसी सिंह और बोमन ईरानी मुख्य भूमिकाओं में थे और फिल्म को संगीत से सजाया अन्नु मलिक और संजय वांड्रेकर ने। मुन्ना भाई एबीबीएस में सुनील दत्त ने संजय के पिता का किरदार निभाया था. इससे पहले  रॉकी और क्षत्रिय में भी सुनील दत्त ने संजय दत्त के पिता की भूमिका निभाई लेकिन ये आखिरी फिल्म थी जब दोनों ने एक साथ स्क्रीन साझा किया...तो चलिए आज आपको सुनाते हैं मुन्ना भाई एमबीबीएस से जुड़ीं दिलचस्प बातें...

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