जिला पंचायत अध्यक्षः अखिलेश यादव के दरबार में लग सकती है सपाइयों की क्लास, पूछेंगे- क्यों हारे हमारे प्रत्याशी

अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 05 Jul 2021 01:30 PM IST
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव।
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उत्तर प्रदेश के जौनपुर सहित अन्य जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर मिली करारी हार को सपाई भितरघाट का भी परिणाम मान रहे हैं। इसे लेकर कार्यकर्ताओं में खासा आक्रोश देखने को मिल रहा है। उधर, प्रदेश अध्यक्ष ने जौनपुर में मिली करारी हार को लेकर फोन पर जिलाध्यक्ष से जानकारी ली है। साथ ही पूरी स्थिति की समीक्षा कर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के बाद सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के दरबार में कुछ दिग्गजों की क्लास भी लग सकती है और उन पर कार्रवाई भी हो सकती है।

समाजवादी पार्टी जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर लगातार तीसरी बार कब्जा जमाने की कोशिश में थी। हालांकि शुरू से ही कुछ दिग्गज नेताओं की निष्ठा पर संदेह जताया जा रहा था। यह मामला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के दरबार तक में पहुंचा था। इतना ही नहीं, पार्टी के मुखिया के सामने 42 जिला पंचायत सदस्यों को पेश कर सब कुछ ठीक-ठाक होने का दावा किया गया था।
सपा के राष्ट्रीय अखिलेश यादव।
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इसके बाद माना जाने लगा था कि सब कुछ ठीक-ठाक हो गया है। सपाई भी अपनी जीत को लेकर इस वजह से दावा कर रहे थे कि उनके पार्टी का झंडा-बैनर लगाने वाले ज्यादा जिला पंचायत सदस्य चुनाव में जीते हैं। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। मतदान के दिन भी पार्टी के कैंप कार्यालय में 39 जिला पंचायत सदस्यों को अपने साथ रखा गया था, जबकि इसके अलावा सेंधमारी कर जीत के लिए 43 मत हासिल करने का सपना संजोए थे। बाद में परिणाम घोषित होने पर 12 ही मत मिले। 
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समाजवादी पार्टी फाइल फोटो।
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इससे साफ हो गया कि सपा के कैंप कार्यालय से निकले जिला पंचायत सदस्यों ने वादा करके क्रास वोटिंग कर दिया। जिसके बाद से इन वोटरों को अपने साथ लेकर चलने वाले दिग्गज नेताओं पर संदेह होने लगा है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी सपा के कार्यकर्ताओं की रार साफ देखने को मिल रही है। जहां पार्टी के कार्यकर्ता अपने ही दिग्गज नेताओं पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।  
समाजवादी पार्टी
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 सपा जिलाध्यक्ष लाल बहादुर यादव ने कहा कि  हम धनबल, बाहुबल और सत्ता के दबाव में हार गए। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पार्टी के कैंप कार्यालय में 39 जिला पंचायत सदस्य मौजूद थे। इसके अतिरिक्त भी कुछ जिला पंचायत सदस्यों से संपर्क था। परंतु पार्टी प्रत्याशी को 12 ही वोट मिले। कार्यकर्ताओं ने भी अपने गुस्से का इजहार किया, क्योंकि उन्होंने ही जिला पंचायत सदस्यों को चुनकर भेजा था। पूरी स्थिति से प्रदेश अध्यक्ष को अवगत करा दिया गया है। विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। जिसे तैयार कर भेज दिया जाएगा।
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समाजवादी पार्टी फाइल फोटो।
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जौनपुर में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में जीत की हैट्रिक बनाने का सपना सपाइयों का टूट गया। सपा का जिले की इस प्रतिष्ठित पद पर अविश्वाश प्रस्ताव आने के बाद 2013 में हुए चुनाव में 
सपा की शारदा चौधरी जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं थीं। इसके बाद 2015 में सपा के ही राज बहादुर यादव बड़े  अंतर से जीत दर्ज की। इस बार भी जीत के सिलसिला का जारी रखने के लिए सपा ने निशी यादव को अपना प्रत्याशी बनाया था। पार्टी ने यह फैसला निशी यादव के परिवार की सक्रियता और उनके राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए लिया था। 2010 में बसपा की अनीता सिद्धार्थ ने जीत दर्ज की थी। हालांकि उनके जाति प्रमाण को लेकर विवाद हुआ था जिसके कारण अविश्वाश प्रस्ताव पारित हुआ था। इसके बाद 2013 में 2013 में हुए चुनाव में सपा की शारदा चौधरी ने जीत दर्ज की थी। 
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