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Azadi Ka Amrit Mahotsav: गुलामी से आजादी दिलाने वाले ये हैं पांच सबसे बड़े विद्रोह, जानें इनके बारे में

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रकाश चंद जोशी Updated Sat, 13 Aug 2022 12:38 PM IST
आजादी के आंदोलन के पांच सबसे बड़े विद्रोह
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Independence Day 2022: कहते हैं आजादी का मतलब हर किसी के लिए जानना जरूरी होता है, क्योंकि बिना मतलब जाने हम उसे असल मायनों में समझ नहीं पाते हैं। भारत इस वर्ष स्वतंत्रता के 75 साल पूरे कर रहा है। इस खास मौके पर देश में 'आजादी का अमृत महोत्सव' मनाया जा रहा है। जगह-जगह तिरंगा यात्राएं निकल रही है और हर कोई आजादी के इस जश्न में सराबोर है। यही नहीं, देशवासियों से अपील की गई है कि 13 से 15 अगस्त के बीच लोग अपने घरों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को फहराएं। इसी कड़ी में आापके लिए ये भी जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर जिस आजादी से हम जी रहे हैं, वो हमें मिली कैसे और इस आजादी को दिलाने के पीछे कौन से बड़े विद्रोह शामिल थे? तो चलिए जानते हैं उन पांच सबसे बड़े विद्रोह के बारे में, जिन्होंने देश को गुलामी से आजादी दिलाने में अहम योगदान निभाया। आप अगली स्लाइड्स में इनके बारे में जान सकते हैं...
आजादी के आंदोलन के पांच सबसे बड़े विद्रोह
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ये हैं वो पांच बड़े विद्रोह:- 

1857 का विद्रोह
  • 1857 का विद्रोह, जिसे हम प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नाम से भी जानते हैं। भले ही मेरठ समेत देश की कई छावनी में छोटी झड़पों और आगजनी से ये विद्रोह शुरू हुआ, लेकिन आगे चलकर इसने एक बड़ा रूप लिया। ब्रिटिश शासन के खिलाफ चला ये सशस्त्र विद्रोह भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 2 वर्षों तक चला।
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आजादी के आंदोलन के पांच सबसे बड़े विद्रोह
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नील विद्रोह
  • 19वीं शताब्दी के लगभग मध्य से लेकर भारत के आजाद होने तक, किसानों द्वारा कई आंदोलन हुए। लेकिन इसमें जो सबसे बड़ा विद्रोह हुआ उसे दुनिया ने नील विद्रोह के नाम से जाना। नील विद्रोह 1859-60 में बंगाल में हुआ। ये अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ पहला संगठित व सर्वाधिक जुझारू विद्रोह था।
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चौरीचौरा कांड
  • 1 फरवरी 1922 को चौरीचौरा थाने के दारोगा गुप्तेशवर सिंह ने उन बलिदानियों की खुलेआम पिटाई शुरू कर दी, जो आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे। ऐसे में सत्याग्रहियों की तरफ से अंग्रेजों (पुलिस वाले) पर पथराव किया गया, जिसके बदले पुलिस ने उन पर तब तक गोलतियां बरसाई जब तक कारतूस खत्म नहीं हो गए। इस गोलीबारी में 260 लोगों की मौत हो गई। इस पर सत्याग्रिहयों ने ब्रिटिश सरकार की एक पुलिस चौकी को आग लगा दी थी, जिसमें लगभग 22 पुलिस वाले जिंदा जल गए थे।
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आजाद हिंद फौज
  • आजाद हिंद फौज को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने तैयार किया था। साल 1942 में नेताजी द्वार इस सशस्त्र सेना का गठन किया गया, जिसके महज एक साल के अंदर ही अंग्रेजी हुकूमत को इसने हिलाकर रख दिया। बताया जाता है कि इस सेन में 85 हजार सैनिक थे, जो देश के लिए मर-मिटने को तैयार थे।
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