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ध्यान दें: आंखों को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है 'यूथ प्रोटीन', इसकी कमी समय से पहले कम कर देती है रोशनी

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 12 Aug 2022 07:30 PM IST
आंखों की बढ़ती समस्या के बारे में जानिए
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शरीर के कई अंगों पर उम्र बढ़ने का असर दिखने लगता है। उम्र के साथ मांसपेशियों और हड्डियों की कमजोरी के साथ कई प्रकार के अन्य रोगों के विकसित होने का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं, 40 की उम्र के बाद शरीर में कई प्रकार के प्रोटीन्स और हार्मोन्स के स्तर में कमी आने लगती है, जिसका शरीर पर कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है। 40 की आयु के बाद लोगों में आंखों की समस्याएं भी बढ़नी शुरू हो जाती है, इसमें निकट की वस्तुओं या छोटे प्रिंट को देखने की क्षमता कम होने लगती है। मेडिकल की भाषा में इस तरह की समस्या को 'एजिंग आई' के रूप में जाना जाता है।

नेत्र रोग विशेषज्ञ बताते हैं, उम्र के साथ आंखों की क्षमता में आने वाली कमी के लिए कुछ प्रकार के प्रोटीन्स और हार्मोन की कमी को प्रमुख कारण के रूप में देखा जाता है। सामान्य तौर पर यूथ प्रोटीन, पिगमेंट एपिथीलियम ड्राइब्ड फैक्टर (पीईडीएफ) आंखों के रेटिना में कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है, जिसके कारण आंखें स्वस्थ बनी रहती हैं। इसमें आने वाली कमी के कारण उम्र बढ़ने से संबंधित आंखों की बीमारियों के बढ़ने का खतरा हो सकता है।

आइए समझते हैं कि यह यूथ प्रोटीन, आंखों की सेहत के लिए कितनी आवश्यक है और इसकी कमी को कैसे दूर किया जा सकता है? 
आंखों के लिए कई प्रकार के प्रोटीन्स की आवश्यकता
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आंखों के लिए बहुत आवश्यक है  पीईडीएफ 

नेशनल आई इंस्टीट्यूट (एनईआई) के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि पीईडीएफ के स्तर में गिरावट रेटिना की समस्याओं को बढ़ा देती है जिसके कारण देखने की क्षमता में कमी आने लगती है। उम्र बढ़ने के साथ कम दिखाई देने के लिए इसे एक प्रमुख कारक के तौर पर देखा जा सकता है। यूथ प्रोटीन प्राकृतिक तौर पर आंखों में रिसाइकिलिंग की प्रक्रिया में विशेष भूमिका निभाता है। सामान्यतौर पर ये प्रोटीन्स रेटिनल पिगमेंट एपिथेलियम (आरपीई) नामक सेल्स द्वारा निर्मित होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ इनमें भी कई प्रकार के विकारों के विकसित होने का खतरा हो सकता है।
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कम होती आंखों की रोशनी को कैसे ठीक करें?
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पीईडीएफ के स्तर में कमी से नुकसान 

अध्ययनकर्ता बताते हैं, उम्र बढ़ने के साथ आंखों, त्वचा, फेफड़ों और अन्य ऊतकों में आरपीई का उत्पादन और पीईडीएफ स्राव कम होने लगता है। पहले के शोध से पता चलता है कि पीईडीएफ फोटोरिसेप्टर कोशिकाओं को नुकसान होने से बचाने और आंखों में असामान्य रक्त वाहिकाओं के विकास को रोक सकता है। उम्र के साथ पीईडीएफ के स्तर में कमी क्यों आने लगती है विशेषज्ञ इसके कारणों को लेकर स्पष्ट नहीं हैं। 
आंखों की समस्याओं पर ध्यान दें
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ? 

आंखों की सेहत के लिए पिगमेंट एपिथीलियम ड्राइब्ड फैक्टर (पीईडीएफ) कितना महत्वपूर्ण होता है, इस बारे में सीनियर कंसल्टेंट और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ रिंपी राणा बताती हैं, आंखों को स्वस्थ रखने और उम्र बढ़ने के कारण रोशनी में आने वाली कमी से बचाने में इसकी विशेष भूमिका हो सकती है। ज्यादातर लोगों में उम्र बढ़ने के साथ इसके स्तर में कमी दिखनी शुरू हो जाती है। इस तरह की कमी की समस्या से बचाव और आंखों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन्स और खनिजों से भरपूर आहार का सेवन बहुत आवश्यक है जो आंखों की कोशिकाओं और आवश्यक प्रोटीन के स्तर को ठीक रखने में मदद कर सके।
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आंखों को स्वस्थ रखने के तरीके
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कैसे रखें आंखों को स्वस्थ?

डॉ रिंपी राणा बताती हैं, आंखों की सेहत का ख्याल रखना एक सतत प्रक्रिया है जिसके लिए हमें लगातार प्रयास करते रहने की आवश्यकता होती है। इसके लिए विटामिन-ए, ई, सी से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए। अध्ययनों में ओमेगा-3 फैटी एसिड वाली चीजों को शामिल करना भी आपको लाभ दे सकता है। आंखों को स्वस्थ रखने के लिए शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना भी आवश्यक है, इनके कारण भी समय से पहले आंखों की रोशनी कम होने का खतरा हो सकता है। 


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स्रोत और संदर्भ
Pigment epithelium-derived factor ablations may lead to eye aging

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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