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Panneerselvam VS Palaniswami : अब तमिलनाडु में राजनीतिक घमासान, जानें क्या है पूरा विवाद?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Mon, 11 Jul 2022 05:46 PM IST
तमिलनाडु में एआईएडीएमके की लड़ाई
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महाराष्ट्र के बाद अब तमिलनाडु में सियासी घमासान मचा हुआ है। विवाद ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (AIADMK) पर आधिकारिक कब्जे को लेकर हो रहा है। सोमवार को पार्टी की जनरल काउंसिल की बैठक हुई। इसमें ई पलानीस्वामी को पार्टी का अंतरिम महासचिव चुन लिया गया। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम और उनके समर्थकों को पार्टी से बाहर करने का भी एलान हो गया।

ये तो आज हुई बैठक का सार था। अब आपको इस विवाद की जड़ तक ले चलते हैं। ये भी बताते हैं कि अब तक AIADMK में क्या-क्या हुआ? आज हुई बैठक में लिए गए फैसलों को भी विस्तार से बताएंगे। पढ़िए पूरी खबर...
 
एमजीआर और करुणानिधि
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पहले पार्टी का इतिहास जान लीजिए
तमिलनाडु में एक फिल्म स्टार हुआ करते थे। नाम था एमजी रामचंद्रन। बहुत मशहूर थे। इतना कि उनकी एक झलक पाने के लिए लोग जान तक देने के लिए तैयार थे। तमिल फिल्म इंडस्ट्री में उनके आगे सब फीके थे। फिल्मों के साथ-साथ वह राजनीति में भी दखल रखते थै। 1953 तक वह कांग्रेस के सदस्य रहे। इसके बाद तमिलनाडु के नेता सीएन अन्नादुरई ने एक नई पार्टी बनाई। इसका नाम रखा द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम यानी DMK रखा। इस वक्त तमिलनाडु में डीएमके की सरकार है। 

एमजीआर भी 1953 में डीएमके से जुड़ गए। एमजीआर के जुड़ने से पार्टी का दबदबा पूरे तमिलनाडु में हो गया। 1962 में एमजीआर विधान परिषद के पहली बार सदस्य बने। 1967 में वह विधायक चुने गए। 1967 में एमजीआर पर जानलेवा हमला भी हुआ। 
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एमजीआर के चित्र पर पुष्प भेंट करतीं जयललिता (फाइल फोटो)
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जब एमजीआर ने नई पार्टी बनाई
1972 की बात है। तब करुणानिधि अपने बेटे एमके मुथु को फिल्म और राजनीति में बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट करने लगे। उधर, एमजीआर पार्टी में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी के आरोप लगाने लगे। खुले मंच से वह करुणानिधि से सवाल पूछने लगे। तब उन्हें पार्टी से बाहर निकाल दिया गया। एमजीआर ने नई पार्टी बनाई और अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (ADMK) नाम दिया। जिसे बाद में बदलकर अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम यानी AIADMK कर दिया गया। इसके बाद AIADMK ने तमिलनाडु में कई चुनाव जीते।

1987 में एमजीआर के निधन के बाद पार्टी दो धड़ों में बंट गई। एक धड़े को एमजीआर की पत्नी जानकी रामचंद्रन और दूसरे को जयललिता ने संभाला। हालांकि, बाद में जयललिता ने खुद को एमजीआर का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। इसके बाद जयललिता लंबे समय तक तमिलनाडु की मुख्यमंत्री भी रहीं। 2014 में जयललिता को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराया गया और चार साल की सजा सुनाई गई। 2015 में उन्हें कोर्ट ने बरी कर दिया और फिर से उन्होंने मुख्यमंत्री का पद संभाल लिया। 2016 में हार्ट अटैक आने से उनकी मौत हो गई। 
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