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Maharashtra : बागी विधायकों के पास अब तीन विकल्प, जानिए शिवसेना पर क्यों दावा नहीं करना चाहते शिंदे?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Sat, 25 Jun 2022 07:00 PM IST
एकनाथ शिंदे, उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे
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महाराष्ट्र की सियासत में खींचातान जारी है। एक तरफ गुवाहाटी में बैठे एकनाथ शिंदे और उनके साथ गए विधायकों ने उद्धव सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा हैं। दूसरी ओर शिवसेना ने भी विधानसभा उपाध्यक्ष के जरिए 16 बागी विधायकों को नोटिस जारी करवा दिया है। इस बीच हर कोई यही जानना चाहता है कि अब आगे क्या होगा? क्या विधायकों की बगावत के चलते उद्धव सरकार गिर जाएगी या फिर दोनों के बीच फिर कोई समझौता होगा? 

बागी विधायकों के पास अभी क्या-क्या विकल्प हैं? क्या कोई नई पार्टी का गठन होगा या भाजपा में शामिल होंगे? आइए जाते हैं...
 
गुवाहाटी के होटल में अपने विधायकों के साथ एकनाथ शिंदे।
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बागी विधायकों के पास अब कौन-कौन से विकल्प हैं? 
ये जानने के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय से संपर्क किया। उन्होंने कहा, 'अगर बागी विधायकों के पास दो तिहाई बहुमत है तो उनके ऊपर दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होता है। ऐसे में बागी विधायकों के पास दो विकल्प बचते हैं। पहला यह कि वह शिवसेना पर अपना हक जताएं और दूसरा यह कि शिवसेना से अलग होकर कोई नई पार्टी बना लें या फिर किसी और दल में शामिल हो जाएं।'

उपाध्याय आगे कहते हैं, 'अगर बागी विधायक शिवसेना पर अपना दावा करते हैं तो ऐसी परिस्थिति में चुनाव आयोग सुनवाई करेगा। बिहार में लोक जन शक्ति पार्टी के विवाद के दौरान भी ऐसा ही हुआ था। चिराग पासवान और उनके चाचा दोनों ने ही पार्टी पर अपना अधिकार जताया था। जैसे ही आयोग के पास ये मामला गया, सबसे पहले पार्टी का सिंबल सीज कर दिया गया।'
 
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उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे
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पार्टी पर दोनों करेंगे दावा तो क्या होगा? 
अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय कहते हैं कि अगर शिवसेना पर दोनों गुट अपना-अपना दावा करते हैं तो चुनाव आयोग इसपर फैसला करेगा। आयोग को विधायकों की संख्या से कोई मतलब नहीं होगा। वह यह देखेगी कि पार्टी के नियम-कानून के हिसाब से कितने राष्ट्रीय कार्यकारिणी या संस्थापक सदस्य पार्टी के किस गुट के साथ हैं। जिस गुट का दबदबा होगा सिंबल उसी को मिल जाएगा।   
 
उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे और बालासाहेब ठाकरे
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नई पार्टी बनाने पर क्या होगा? 
अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय कहते हैं कि बागी विधायक एक बार शिवसेना छोड़ देते हैं तो उनका स्टेटस निर्दलीय विधायक का हो जाएगा। ऐसी स्थिति में वह कुछ भी कर सकते हैं। कोई नई पार्टी का गठन भी कर सकते हैं। जैसा कि समता पार्टी में फूट के बाद जेडीएस और जेडीयू का गठन हुआ।
 
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महाराष्ट्र में सियासी घमासान
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अब तक क्या-क्या हुआ? 
21 जून को उद्धव ठाकरे से नाखुश चल रहे विधायकों सूरत चले गए। इन विधायकों का नेतृत्व कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे कर रहे थे। यहां से ये सभी गुवाहाटी पहुंचे।  इन विधायकों को मनाने के लिए 22 जून को शिवसेना प्रमुख के कहने पर तीन नेताओं का प्रतिनिधिमंडल बागी विधायकों से मिलने पहुंचा। हालांकि कुछ बात नहीं बनी। 

इसके बाद उद्धव ने फेसबुक लाइव पर जनता को संबोधित किया। इसमें उन्होंने कहा कि अगर शिंदे और नाराज विधायक सामने आकर कहें तो वह इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। शिवसेना ने चुनाव आयोग और विधानसभा उपाध्यक्ष से भी बागी विधायकों पर कार्रवाई करने की मांग की है। विधानसभा उपाध्यक्ष ने 16 विधायकों को नोटिस जारी कर 27 जून तक जवाब मांगा है। उधर, चर्चा ये भी है कि बागी विधायक शिवसेना बालासाहेब नाम से नई पार्टी के गठन का एलान कर सकते हैं।
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