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Upasana Singh: मिस यूनिवर्स को बेटे की हीरोइन बनाकर बनीं निर्देशक, जन्मदिन के जश्न से दूर रहती हैं उपासना

अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: मोहम्मद फायक अंसारी Updated Tue, 28 Jun 2022 05:40 PM IST
उपासना सिंह
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हिंदी फिल्मों में हीरो जब किसी फिल्म में पहली बार परदे पर उतरता है तो उसके लिए खास संवाद, खास सीक्वेंस और खास बैकग्राउंड म्यूजिक तक बनाया जाता है, बात हीरोइनों की हो तो ऐसी दृश्यावलियां कम ही ध्यान आती हैं। हां, अभिनेत्री उपासना सिंह इसका अपवाद हैं। उनका संवाद ''शैतान से जन्मी, अंधेरों में पली, कहते हैं सब मुझको काली परी'' अब तक लोगों को खूब याद है। 29 जून 1975 को पंजाब के होशियारपुर में पैदा हुईं उपासना सिंह अपनी मां के निधन के बाद से अपना जन्मदिन नहीं मनाती हैं। इन दिनों वह बीते साल की मिस यूनिवर्स हरनाज कौर संधू के साथ अपने बेटे को लॉन्च करने की तैयारियों में व्यस्त हैं और इस फिल्म का निर्देशन भी खुद ही करने जा रही हैं। अपने जन्मदिन की पूर्व संध्या पर उपासना सिंह से ‘अमर उजाला’ की एक एक्सक्लूसिव मुलाकात..
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सब कुछ बेच मां ने मुंबई में खरीदा घर 
उपासना सिंह बताती हैं, ‘पिता महेंद्र सिंह का होशियारपुर में स्पेयर पार्ट्स का बिजनेस था और मां संतोष सिंह जॉब करती थीं। सिख परिवार से हूं तो परिवार के बाकी लोग मेरे एक्टिंग में आने के खिलाफ थे। उस वक्त मेरी मां और मेरी बहन ने मेरा साथ दिया। मेरी मम्मी पढ़ी लिखी थीं। उन्होंने कहा कि मुझे अपने बच्चों पर यकीन है। मेरी मम्मी ने मुझे बहुत सपोर्ट किया। उनको शादी में जो भी ज्वेलरी मिली थी और जो उन्होंने गाड़ी खरीदी थी उन सबको बेचकर उन्होंने मुंबई में मेरे लिए वन रूम किचन का अंधेरी में घर खरीदा और कहा कि छत की परेशानी दूर अब तुम मन लगाकर वह काम करो जिसमें तुम्हारा दिल लगता है।’
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बहन का त्याग भी, आशीर्वाद भी
अपनी मां के अलावा उपासना को अपनी बहन का साथ भी मिला और आशीर्वाद भी। वह बताती हैं, ‘मेरी बहन निरुपमा सिंह होशियारपुर के गवर्नमेंट कॉलेज में उन दिनों लेक्चरर थी। मैं कभी अकेले बाहर रही नहीं थी। इसलिए मेरी बहन मेरे साथ अपनी नौकरी छोड़कर आ गई। ऐसा कौन करता है। मेरी बहन ने बड़ी कोशिश की कि उसका ट्रांसफर पंजाब से मुंबई हो जाए लेकिन नहीं हुआ। मुझे आगे बढ़ाने में मेरी बहन और मां का बहुत बड़ा त्याग रहा है।' 
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लेडी अमिताभ का मिला तमगा
उपासना सिंह कहती हैं, 'देखा जाए तो फिल्म जगत में मुझे सबसे ज्यादा टाइटल मिले हैं। मैंने जब राजस्थानी फिल्म 'बाई चली सासरिये' की तो लोग मुझे राजस्थान की मीना कुमारी कहने लगे। फिर जब मैने एक्शन फिल्में करनी शुरू कीं तो लोगों ने मुझे लेडी अमिताभ बच्चन कहना शुरू कर दिया। जब कॉमेडी करनी शुरू की तो लोगों ने कॉमेडी क्वीन कहा। इंडस्ट्री में मेरे फैंस की तरफ से जो टाइटल मिले हैं वो मैं ही हूं।'
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बहुत सारे डायलॉग हिट हुए
‘इस मामले में मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूं। 'जुदाई' का मेरा संवाद 'अब्बा डब्बा जब्बा' हिट हुआ। फिर फिल्म ‘माय फ्रेंड गणेशा’ में गंगूताई का किरदार निभाया तो उसका डायलॉग 'ओइच तो बोली मैं' काफी हिट हुआ। उसके बाद मैने एक सीरियल सोनपरी किया था, इसमें मैंने काली परी क्रोएला का किरदार निभाया था। इसका डायलॉग ''शैतान से जन्मी, अंधेरों में पली, कहते हैं सब मुझको काली परी'' काफी हिट रहा। कपिल शर्मा के शो का डायलॉग 'कौन है ये आदमी' काफी हिट रहा। इस शो में कपिल की बुआ बनना काफी यादगार भी रहा।’
 
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