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Independence Day 2022: इन देशभक्ति गानों के पीछे की कहानी जानते हैं आप? एक तो लिखा गया सिगरेट की डिब्बी पर

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Mon, 15 Aug 2022 09:31 AM IST
आजादी का अमृत महोत्सव
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आज देश राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा है। देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हुए आज 75 वर्ष पूरे हो गए हैं और हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। राष्ट्रीय पर्व के मौकों पर फिजा में उमंग का एक अलग ही रंग घुला हुआ महसूस होता है। हो भी क्यों न! आखिर देश की आजादी की बात है। इस दौरान देशभक्ति गाने इस माहौल को और खूबसूरत बना देते हैं। इन गानों में खुशी, उल्लास के साथ ही आजादी के दीवानों के सघर्ष की गाथा भी सुनने को मिलती है, तो देश का गुणगान भी। कुछ देशभक्ति गाने भावुक कर देते हैं तो कुछ झूमने को मजबूर। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से हर एक देशभक्ति गीत को लिखे जाने के पीछे भी एक खूबसूरत कहानी हैं। आइए जानते है...
लता मंगेशकर
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सिगरेट की डब्बी पर लिखा गया था 'ए मेरे वतन के लोगों..'
यह देशभक्ति के गानो में पहले पायदान पर आता है। सुनने वालों को यह गाना भावुक कर जाता है। इस गाने को कवि प्रदीप ने लिखा था और स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी ने गाया था। दरअसल, फिल्मों में देशभक्ति गानों का चलन शुरू करने का श्रेय भी इस गाने के रचयिता कवि प्रदीप को जाता है। इस गाने को लिखने के पीछे एक कहानी है। यह गाना वर्ष 1963 में लिखा गया था। दरअसल, यह लोकप्रिय गीत भारत-चीन युद्ध के बाद लिखा गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत-चीन युद्ध के बाद जब दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने का विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ तो उसके लिए कवि प्रदीप से एक खास गीत लिखने के लिए कहा गया। एक रोज प्रदीप सुबह के वक्त समुद्र के किनारे टहल रहे थे। तभी उनके दिमाग में इस गाने की कुछ लाइनें आईं। उस दौरान उनके पास न तो कोई कलम थी न कागज। उन्होने एक मुसाफिर से कलम मांगी और सिगरेट की डिब्बी के फॉइल पेपर को कागज बनाकर उस पर गाना लिख लिया। बाद में उन्होंने यह गाना पूरा किया। इस गाने को लता मंगेशकर ने स्वर दिए। हालांकि, लता दी ने पहले तो इस गाने को गाने से इनकार ही कर दिया था, लेकिन फिर काफी मनाए जाने के बाद वह राजी हुईं। सिगरेट पर लिखे इस गाने ने जो इतिहास रचा है, आज उससे सभी परिचित हैं। 26 जनवरी 1963 को जब दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के सामने जब यह गीत गाया गया तो उनकी आंखे भी भर आई थीं। 
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अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों..
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'अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों...'
देशभक्ति गानों का जिक्र होगा तो 1964 में आई फिल्म 'हकीकत' का 'अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों' गाना भुलाया नही जा सकता। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह फिल्म और यह गाना 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाने के बाद शुरू हुए। दरअसल, कवि प्रदीप के लिखे और लता जी के गाए गाने 'ऐ मेरे वतन के लोगों' की लोकप्रियता के बाद ही फिल्म 'हकीकत' बनी। इस फिल्म के गाने कैफी आजमी ने लिखे। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत-चीन युद्ध के बाद भारत की हार की हकीकत बताने के लिए 'हकीकत' फिल्म का निर्माण किया गया था। चेतन आनंद द्वारा बनाई गई यह फिल्म पंडित जवाहर लाल नेहरू को समर्पित थी। इस फिल्म के गाने 'अब तुम्हारे हवाले' ने दर्शकों को रोमाचित कर दिया था और यह सिलसिला अभी तक जारी है। इस गाने को रफी साहब ने गाया था।
मेरे देश की धरती सोना उगले..
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'मेरे देश की धरती सोना उगले...'
1964 में आई फिल्म 'उपकार' का गाना 'मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती..' सुनने वालों को गर्व से भर देता है। इस गाने ने महेद्र कपूर के करियर मे भी चार चांद लगा दिए थे। इस गाने को गुलशन बावरा ने लिखा था और इसे संगीत कल्याणजी-आनंदजी ने दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म 'उपकार' को तत्कालीन पीएम लाल बहादुर शास्त्री के कहने पर उनके 'जय जवान, जय किसान' नारे पर किया था। हालाकि, अफसोस की बात यह है कि जब इस फिल्म का प्रदर्शन हुआ तो लाल बहादुर शास्त्री का तब तक निधन हो गया था। 1970 मे आई फिल्म 'पूरब और पश्चिम' का गाना है 'प्रीत जहा की रीत सदा...' भी महेद्र कपूर ने अपने सुरो से सजाया। यह गाना भी खूब पसंद किया जाता है।
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अबके बरस तुझे धरती की रानी
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'अबके बरस तुझे धरती की रानी...'
फिल्म 'क्रांति' का गाना 'अब के बरस तुझे धरती की रानी...' भी खूब पसंद किया जाता है। इसे संतोष आनंद ने लिखा। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होने यह गाना भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान लिखा था। उन्होंने इसे पहले लाल किले के कवि सम्मेलन में गया। मनोज कुमार ने यह गाना सुना तो वह बेहद प्रभावित हुए। फिर उन्होंने इस गाने को 1981 में फिल्म 'क्रान्ति' में लिया। महेंद्र कपूर के गाये इस गीत का संगीत लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल ने दिया था।
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