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80 साल-80 किस्से: राजीव गांधी के कहने पर राजनीति में आए थे बिग बी, हैरान कर देगी संन्यास लेने की वजह

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: निधि पाल Updated Tue, 11 Oct 2022 11:22 AM IST
अमिताभ बच्चन
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मेगा स्टार अमिताभ बच्चन को सदी का महानायक कहा जाता है। देश के साथ-साथ विदेश में भी उनके चर्चे होते हैं। एक उम्र के बाद उनकी एक्टिंग में जो परिपक्वता आई है, वो तारीफ के काबिल है। इतनी उम्र हो जाने के बाद भी अमिताभ के काम करने का तरीका युवाओं जैसा ही है। 11 अक्टूबर को बॉलीवुड के शहंशाह अपना 80वां जन्मदिन मना रहे हैं। लेकिन अभी तक उनके अभिनय का जादू पर्दे पर बरकार है। तो चलिए अमिताभ के 80वें जन्मदिन पर 'बॉलीवुड का शहंशाह, 80 साल-80 किस्से' सीरीज के तहत जानते हैं, एक्टिंग से बिग बी राजनीति में कैसे पहुंचे-
राजीव गांधी, अमिताभ बच्चन
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इंदिरा गांधी का तीसरा बेटा
बच्चन परिवार का राजनीति से गहरा संबंध रहा है। वहीं अमिताभ बच्चन भी देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के काफी करीबी माने जाते हैं। अमिताभ बच्चन और नेहरू-गांधी परिवार की नजदीकियां इस कदर बढ़ गई थीं कि अमिताभ को इंदिरा गांधी का तीसरा बेटा तक कहा जाता था। बता दें कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद अपने दोस्त राजीव गांधी के कहने पर राजनीति में आए थे।

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राजीव गांधी, अमिताभ बच्चन
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हेमवती नंदन को भारी मतों के अंतर से हराया था
अमिताभ बच्चन 1984 के लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र से मैदान में उतरे थे। चुनाव के समय इलाहाबाद की गलियों में अमिताभ के पोस्टर लगाकर विरोधी पार्टी के नेता उनका मजाक उड़ाते थे। उन्हें नचनिया कहते थे। लेकिन इन सबसे हटकर अमिताभ बच्चन यूपी के पूर्व सीएम हेमवती नंदन बहुगुणा को हराने में सफल हो गए थे। उस दौर में बहुगुणा को हराना बड़ी टेढ़ी खीर थी, लेकिन बिग बी ने कर दिखाया था।
राजीव गांधी, अमिताभ बच्चन
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बिग बी वजह से बदला गया राष्ट्रपति भवन का नियम
चुनाव जीतने के बाद बिग-बी संसद के सदस्य बनाए गए थे। उन्हें अन्य सांसदों के साथ राष्ट्रपति भवन में डिनर पर बुलाया गया था। जब सभी लोग डिनर के लिए बैठे तो उनकी नजर थाली पर पड़ी। उस दौरान राष्ट्रपति भवन की थालियों में अशोक स्तंभ का चिन्ह बना हुआ होता था। राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को थाली पर बना देख बिग-बी को काफी असहज महसूस हुआ और उन्हें ये राष्ट्रीय चिन्ह का अपमान लगा। इसपर बिग-बी ने अपने विचार वहां बैठे सभी लोगों के सामने व्यक्त किए। राजनेताओं के बीच अमिताभ बच्चन का ऐसा कहना बहुत ही प्रभावशाली सिद्ध हुआ और वहां बैठे अधिकतर लोगों ने इसे सही ठहराया। इस घटना के कुछ ही दिनों बाद एक नया कानून पारित हुआ जहां राष्ट्रपति भवन की सभी थालियों से राष्ट्रीय प्रतीक हटाने का फैसला लिया गया।
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अमिताभ बच्चन, सोनिया गांधी
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राजीव गांधी भी चाहते थे बिग बी का इस्तीफा 
जाने-माने पत्रकार रशीद किदवई ने अपनी किताब ‘नेता अभिनेता : बॉलीवुड स्टार पावर इन इंडियन पॉलिटिक्स’ में  अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी की नजदीकियों पर काफी कुछ लिखा है। रशीद किदवई ने लिखा, ‘एमएल फोतेदार के अनुसार 1984 में राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अमिताभ बच्चन कांग्रेस में काफी मजबूत हो गए थे। मंत्रालय के अधिकारियों की नियुक्तियों और ट्रांसफर में अमिताभ बच्चन की दखलअंदाजी की खबरें राजीव गांधी तक पहुंच रही थीं। पार्टी के कई नेता राजीव गांधी से अमिताभ बच्चन की शिकायत कर रहे थे।’ उनकी किताब के अनुसार राजीव गांधी खुद अमिताभ बच्चन का इस्तीफा चाहते थे।
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