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Haridwar: 11 साल के बच्चे ने खुद रची अपने अपहरण की कहानी, फिल्म देखकर बनाया प्लान, वजह जानकर चौंक गए सब

संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 10 Dec 2022 01:24 AM IST
अपहरण के सूचना पर जांच करती पुलिस
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हरिद्वार के ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र में बैक्वेट हॉल संचालक के 11 वर्षीय बेटे ने अपने ही अपहरण की कहानी रच डाली। अपहरण की कहानी में बार-बार बयान बदलने पर आखिरकार उसने सच उगल दिया। उसने बताया कि ट्यूशन जाने से बचने के लिए उसने ऐसा किया। बच्चे की कहानी ने कुछ घंटे पुलिस को जरूर छकाया। दो दर्जन से अधिक सीसीटीवी कैमरे छाने गए।

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लेकिन उनमें न तो बच्चा दिखा और न अपहरण करने वाले युवक। रात तक पुलिस ने कहानी से पर्दा उठाते हुए स्पष्ट कर दिया कि ट्यूशन जाने से बचने के लिए उसने अपहरण की काल्पनिक कहानी बना ली। बच्चे ने पूछताछ में बताया कि वह परिजनों की डांट से नाराज और परेशान था। इसलिए ट्यूशन न जाने के लिए उसने यह सब कहानी बनाई। फिल्मों में देख कर उसके मन में यह विचार आया था। 

पुलिस के मुताबिक पीठ बाजार निवासी अनुराग झा के शहर में अलग-अलग जगहों पर तीन बैक्वेट हैं। उनका 11 वर्षीय बेटा देव कक्षा पांचवीं में पढ़ता है। देव पीठ बाजार में संगीता टॉकीज के समीप रोजाना साइकिल से ट्यूशन पढ़ने जाता है। शुक्रवार शाम भी वह घर से साइकिल पर ट्यूशन के लिए निकला। लेकिन वह ट्यूशन नहीं पहुंचा। कुछ देर बाद उसने घर पहुंचकर बताया कि उसे चार लोगों ने उसका रास्ता रोक लिया।
अपहरण
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चारों युवक दो अलग-अलग दुपहिया वाहनों पर थे। दो युवकों ने उसे जबरदस्ती अपनी बाइक पर बैठा लिया। जबकि दूसरे बाइक का एक युवक उसकी साइकिल लेकर चला गया। चौथा युवक दूसरी बाइक से उनके पीछे आने लगा। देव ने पुलिस को बताया कि लोधमंडी में उसे युवक लेकर पहुंचे। जहां एक साधु रास्ते में खड़ा था। जिसे देखकर युवकों ने बाइक रोक दी। युवक उससे बात करने लगे और साधु के चरण स्पर्श करने लगे।
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सीसीटीवी
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इसी बीच वह उनके चंगुल से निकल गया और किसी तरह बचकर घर पहुंचा। देव ने मां को इसकी जानकारी दी और पुलिस घटना के बारे में बताया। सूचना मिलते ही एसएसपी अजय सिंह ने तत्काल मामले की जांच करने के निर्देश दिए। ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी आरके सकलानी, एसएसआई अंशुल अग्रवाल, रेल चौकी प्रभारी सुधांशु कौशिक सहित तमाम पुलिसकर्मी उसके घर पहुंचे। बच्चे से पूछताछ की। उसके साथ ट्यूशन जाने वाले रास्ते का मुआयना किया। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर दो दर्जन से ज्यादा लगे सीसीटीवी को चेक किया लेकिन कहीं भी देव या उसके बताए युवक नजर नहीं आए।
एसएसपी अजय सिंह
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बच्चा बार बार बयान बदलते रहा। जबकि देव घर साइकिल से पहुंचा था। जबकि कहानी में उसने बताया था कि उसकी साइकिल एक युवक लेकर चला गया। वह युवकों के चंगुल से कहां से भागकर आया, उस जगह को भी नहीं बता सका। शंका होने पर पुलिस ने उससे पूछताछ की तो उसने सच उगल दिया। बताया कि ट्यूशन नहीं जाना चाहता है। मां की डांट और ट्यूशन जाने से बचने के लिए उसने झूठ बोला।
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वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह
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बच्चा ट्यूशन नहीं जाना चाहता था। जिसको लेकर उसकी मां ने उसे दोपहर में डांट दिया था। सिर्फ ट्यूशन जाने से बचने के लिए और घर पर ही रहने के लिए उसने अपने अपहरण की फर्जी कहानी आकर घरवालों को बताई। परिवार ने ज्वालापुर पुलिस को इसकी सूचना दी। लेकिन जांच में कहीं भी अपहरण की पुष्टि नहीं हो पाई। बाद में बच्चे ने भी स्वीकार किया कि उसने सिर्फ ट्यूशन जाने से बचने के लिए उसने यह सब किया।
- अजय सिंह, एसएसपी, हरिद्वार 
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