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उत्तराखंड बनने के बाद सिर्फ तीन अंतरराष्ट्रीय एथलीट!

ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 31 Mar 2015 11:17 AM IST
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shortage of international player in sports college.

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रवींद्र रौतेला, मनीष रावत, हरीश कोरंगा, पंकज डिमरी उत्तराखंड एथलेटिक्स टीम के ऐसे चुनिंदा खिलाड़ी हैं, जिन पर देश की भी निगाहें हैं।
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मगर इनके बाद उत्तराखंड का प्रतिनिधत्व किसके कंधों पर होगा, यह सवाल भी खड़ा होने लगा है। भविष्य के चैंपियनों के लिए महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज पर सभी की निगाहें हैं, लेकिन बीते साढ़े 4 सालों से कॉलेज से एक भी नेशनल चैंपियन नहीं निकल सका है। जबकि पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर से अच्छे खिलाड़ी निकल रहे हैं।


राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तराखंड के खिलाड़ियों का हमेशा दबदबा रहा है। वर्तमान समय में भी राज्य के सीनियर खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इनके मैदान से रिटायर होने के बाद कौन है, यह एक सवाल सुलग रहा है।

उत्तराखंड के खिलाड़ियों को तराशने का जिम्मा संभाल रहे महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज भी बीते कई सालों से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के मामले में कॉलेज सूना है। हाल यह है कि राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी खिलाड़ियों का प्रदर्शन सामान्य रहा है।
इसी कॉलेज से पंकज डिमरी, प्रीतम बिंद, विनीत मलिक जैसे अंतरराष्ट्रीय धावक भी निकले हैं। लेकिन वर्तमान समय में कॉलेज के एथलीटों को संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि पिथौरागढ़ एथलेटिक्स हॉस्टल और ऊधमसिंह नगर से निकल रहे एथलेटिक्स खिलाड़ी बिना कोचों के भी अपना दमखम दिखा रहे हैं।

खासकर पिथौरागढ़ में तो एथलेटिक्स के लिए पर्याप्त मैदान भी नहीं है, इसके बावजूद राष्ट्रीय पदक विजेताओं के दर्जन भर से अधिक खिलाड़ी पिथौरागढ़ हॉस्टल ने दिए हैं। वहीं बीते साल राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में ऊधमसिंह नगर ने सभी आयु वर्गों में अपना दबदबा बनाया था।

दूसरी ओर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पुलिस के खिलाड़ियों के सहारे उत्तराखंड के कोच और एसोसिएशन अपनी अपनी पीठ ठोकती फिरते हैं, लेकिन सीनियर खिलाड़ियों के रिटायर होने के बाद कौन नया है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। बस सब का कहना है जूनियर तो हैं, बस तैयार हो रहे हैं।

कॉलेज में सिंथेटिक ट्रैक बनने से खिलाड़ियों को सुविधा मिलेगी। मगर लंबे समय से परिणाम नहीं आने के मामले को स्वयं के स्तर से देखूंगा। कोचिंग की व्यवस्था भी सुधरवायी जाएगी और स्थायी प्रधानाचार्य का मुद्दा भी जल्द हल होगा।
- दिनेश अग्रवाल, खेल मंत्री

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