नेपाल की कार्यकारी सरकार को झटका

काठमांडू/एजेंसी Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
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नेपाल की कार्यवाहक सरकार की जल्द चुनाव कराने की योजना को झटका देते हुए राष्ट्रपति रामबरन यादव ने चुनाव से संबंधित दो अध्यादेशों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि ये अध्यादेश अप्रासंगिक हो गए हैं।
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राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी प्रेस वक्तव्य में कहा गया कि राष्ट्र प्रमुख ने इस संबंध में फैसला चुनाव आयोग द्वारा गत 30 जुलाई को की गई उस घोषणा का उल्लेख करते हुए किया जिसमें कहा गया था कि अगर उसे मंजूरी मिल भी जाती है तब भी प्रधानमंत्री के वादे के अनुसार 22 नवंबर को चुनाव कराने के लिए यह पर्याप्त नहीं होगा।
वक्तव्य में कहा गया है कि बदली परिस्थितियों के मद्देनजर दोनों अध्यादेशों की कोई प्रासंगिकता नहीं है। मंत्रिमंडल ने गत 27 जुलाई को दो अध्यादेश राष्ट्रपति के पास भेजे थे, जिसमें चुनाव कराने के लिए कानूनी और संवैधानिक बाधाओं को दूर करने का प्रावधान था। ये अध्यादेश थे चुनाव कानून संशोधन अध्यादेश, 2012 और संविधान सभा चुनाव अध्यादेश, 2012। राष्ट्रपति कार्यालय के सूत्रों ने कहा, ‘खारिज किया जाना दर्शाता है कि पार्टियों के बीच आम सहमति के बिना उनका भी वही हश्र होगा।’
‘अध्यादेशों को मंजूरी न देना अलोकतांत्रिक’
प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई के राजनीतिक सलाहकार देवेंद्र पौडेल ने राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेशों को मंजूरी ने देने को अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक करार दिया है। काठमांडू में एक कार्यक्रम के दौरान पौडेल ने कहा कि चुनाव के लिए बन रहा माहौल राष्ट्रपति के इस निर्णय से प्रभावित होगा।

उन्होंने कहा कि सरकार इन अध्यादेशों में बिना कोई बदलाव किए राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए फिर से भेजेगी। पौडेल के अनुसार राष्ट्रपति के पास इन अध्यादेशों को मंजूरी देने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। पौडेल ने यह भी कहा कि पीएम सिर्फ इस बात को लेकर पद नहीं छोड़ेंगे की पार्टियां उनसे ऐसा करने की मांग कर रही हैं।
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