भूटान-चीन सीमा विवाद हल करने की कोशिशें तेज

बीजिंग/एजेंसी Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
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भारत का भूटान पर प्रभाव बीजिंग और थिंपू के बीच सीमा विवाद सुलझाने में निर्णायक हो सकता है। चीनी विशेषज्ञ फू शियोकियांग ने कहा है कि नई दिल्ली का भूटान पर जबर्दस्त प्रभाव है। फू चीन सरकार के इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेमपरेरी इंटरनेशनल रिलेशन में शोधकर्ता हैं। भारत और भूटान के नजदीकी रिश्तों पर सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स से फू ने यह बात कही।
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उन्होंने कहा कि अगर भूटान चीन के साथ सीमा विवाद को हल करता है तो इसके परिणाम उन मानकों को तय कर देंगे जिन्हें भारत-चीन सीमा विवाद वार्ता में अपनाया जा सकता है। चीन के किसी विशेषज्ञ की यह टिप्पणी तब आई है जब 20वें राउंड की सीमा वार्ता के लिए चीनी विदेश मंत्री फू यिंग ने हाल ही में भूटान की यात्रा की है।
विदेश मंत्री यिंग की थिंपू यात्रा जून में रियो डी जनेरियो में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान भूटान के प्रधानमंत्री जिग्मी वाई थिनले के अपनी चीनी समकक्ष वेन जियाबाओ से अचानक मुलाकात के बाद हुई। रियो डी जनेरियो में दोनों देशों के नेताओं ने राजनयिक संबंध स्थापित करने की इच्छा जताई जताई थी। भूटान 1951 में चीन द्वारा तिब्बत पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद से ही भारत के साथ रहा है।
बीजिंग और थिंपू के रिश्ते सीमा विवाद को लेकर पारंपरिक रूप से तनावपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों की तकरीबन 470 किलोमीटर सीमा एक-दूसरे से लगती है। वर्ष 1998 में दोनों देशों ने भूटान-चीन बॉर्डर पर शांति बनाए रखने के लिए समझौता किया था। भूटान-चीन के बीच किसी भी तरह के सीमा विवाद हल का चंबी घाटी में लागू होगा, इस जगह चीन-भारत औक भऊटान की सीमाएं मिलती हैं। यह जगह सिलीगुड़ी से मात्र 500 किलोमीटर दूर है। चीनी विदेश मंत्री यिंग ने 10 अगस्त को भऊटान नरेश जिग्मे वांगचुक से भी मुलाकात की थी। एजेंसी

कहीं भारत से दूर तो नहीं जा रहा भूटान
कहीं भारत का नजदीकी सहयोगी भूटान चीन की तरफ तो नहीं जा रहा है। पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रम कुछ इसी तरह के संकेत कर रहे हैं। हाल ही में भूटान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए चीन से मदद मांगी है। वह चाहता है कि 2013-14 में यह सुरक्षा परिषद का सदस्य बने।

चीन के प्रतिनिधिमंडल की भूटान यात्रा के बाद सोमवार को यह जानकारी भूटान के विदेश मंत्रालय ने दी। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद पर वार्ता हुई है। भूटान तीन तरफ से भारत से घिरा है। इसके एक तरफ चीन की सीमा है। वह अब तक अंतरराष्ट्रीय संबंधों और मसलों पर भारत के साथ रहा है। अब उसकी अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षाएं पूरी करने के लिए चीन उससे कह सकता है कि वह भारत से दूरी बनाए। चीन भूटान से दलाई लामा की यात्राएं कम करने या बंद कराने को भी कह सकता है।
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