भारतीय-अमेरिकी ने कोलोन कैंसर का इलाज खोजा

ह्यूस्टन/एजेंसी Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
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कोलोन कैंसर के मरीजों के लिए अच्छी खबर है। ‘आनुवांशिक अतिसंवेदनशीलता’ इस बीमारी के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऐसा एक भारतीय-अमेरिकी प्रोफेसर ने अपने अध्ययन में कहा है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि अगर इन कमजोर कड़ियों को ध्यान में रखकर दवाओं को तैयार किया जाए तो कोलोन कैंसर से निपटने में मदद मिल सकती है। यह बीमारी ऐसी है कि अगर एक बार फैल जाए तो इसका इलाज करना संभव नहीं होता है।

वैज्ञानिक अक्सर कैंसर को एक आनुवांशिक बीमारी के तौर पर देखते हैं। हालांकि अब तक इस बारे में कुछ भी पता नहीं चल सका है कि इस बीमारी की शुरुआत कहां से होती है। उनका कहना है इस बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करने के बाद कि किन आनुवांशिक बदलावों के कारण कैंसर विकसित होता और पनपता है, उसके इलाज की बेहतर पद्धति खोजी जा सकती है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के भारतीय अमेरिकी-प्रोफसर और कोलोन कैंसर पर हुए अध्ययन के मुख्य अन्वेषक राजु कुचेरलापति इस विषय पर पिछले 20 साल से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अध्ययन से कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल हुई हैं, जो कैंसर के बारे में हमें बेहतर सूचना देती हैं और इसके इलाज के लिए नया मौका देने का अवसर भी प्रदान करती हैं।

प्रोफेसर ने बताया कि अकेले अमेरिका में हर साल करीब 150,000 नए मरीज कोलोन कैंसर का इलाज कराते हैं और 50,000 लोग इस बीमारी से मर जाते हैं। वहीं दुनिया भर में पांच लाख से ज्यादा लोग इस कैंसर से पीड़ित हैं। फिलहाल इसके इलाज के लिए कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी सर्जरी की जाती है, जो अध्ययन के अनुसार अधिक प्रभावी नहीं हैं।

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