जिरह के लिए भारत को पत्र लिखेगा पाक

इसलामाबाद/एजेंसी Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
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मुंबई हमलों के मामले में अहम गवाहों से जिरह की अनुमति के लिए पाकिस्तान सरकार भारत को पत्र लिखेगी। इससे पहले पाकिस्तान की एक अदालत ने मामले में सबूत एकत्रित करने भारत गए पाक न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। संघीय जांच एजेंसी के विशेष अभियोजक मोहम्मद अजहर चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान सरकार कानूनी जरूरतें पूरी करने के लिए भारतीय गवाहों से जिरह के संबंध में भारत के अधिकारियों को पत्र लिखेगी।
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मालूम हो कि 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों की साजिश रचने और उन्हें अंजाम देने के आरोपी सात पाकिस्तानी संदिग्धों पर मुकदमा चला रही आतंकवाद रोधी अदालत ने मार्च में भारत का दौरा करने वाले आयोग की रिपोर्ट को गैरकानूनी कहकर खारिज कर दिया था। न्यायाधीश चौधरी हबीब उर रहमान ने कहा था कि अगर भारत और पाकिस्तान की सरकारें गवाहों से जिरह के लिए तैयार हो जाती हैं तो एक और आयोग को मुंबई भेजा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अभियोजक पाकिस्तानी आरोपियों के खिलाफ चार भारतीय गवाहों के बयानों का इस्तेमाल तभी कर सकते हैं जब भारतीय अधिकारी बचाव पक्ष के वकीलों को गवाहों से जिरह की अनुमति दें।
न्यायिक आयोग की 800 पन्नों की रिपोर्ट अदालत में पेश करने वाले विशेष अभियोजक चौधरी ने डॉन अखबार को बताया कि आयोग की रिपोर्ट को दरकिनार करने से आरोपियों को फायदा होगा क्योंकि अभियोजन पक्ष चार अहम गवाहों के बयानों को इस्तेमाल नहीं कर सकता। चौधरी की दलील है कि अगर सात आरोपियों को छोड़ दिया जाता है तो इसके लिए मुंबई में आयोग के कामकाज पर निगरानी रखने वाले भारतीय न्यायाधीश एसएस शिंदे जिम्मेदार होंगे क्योंकि शिंदे ने कानून का और आपराधिक प्रक्रिया संहिता की संबंधित धाराओं का पालन नहीं किया।
उन्होंने कहा कि न्यायाधीश शिंदे ने अभियोजक उज्ज्वल निकम के अनुरोध पर भारतीय गवाहों से जिरह से मना किया था। वकील रियाज अकरम चीमा ने कहा कि बचाव पक्ष के वकील अब भी गवाहों से जिरह के लिए भारत जाना चाह रहे हैं।
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