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पनेटा ने चीन को दी चेतावनी

सिंगापुर/एजेंसी Updated Sun, 03 Jun 2012 12:00 PM IST
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एशिया प्रशांत क्षेत्र की अपनी नीति के तहत अमेरिका ने कहा है कि वह अपने अधिकतर युद्धपोत इस क्षेत्र में तैनात करेगा। अमेरिकी रक्षा मंत्री लियोन पनेटा ने शनिवार को घोषणा की कि वर्ष 2020 तक अमेरिकी बेड़े के 60 प्रतिशत युद्धपोत एशिया प्रशांत क्षेत्र में तैनात किए जाएंगे।
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उन्होंने यह बात सिंगापुर में क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी बैठक को संबोधित करते हुए कही। अमेरिकी नौसेना के पास फिलहाल 285 जंगी जहाज हैं। इनमें से आधे एशिया प्रशांत में पहले ही तैनात हैं। समझा जाता है कि पनेटा ने चीन को दक्षिणी चीन सागर पर परोक्ष रूप से चेतावनी दी है।
एशिया प्रशांत क्षेत्र में ज्यादा युद्ध पोतों की तैनाती के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह पिछले साल नवंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा घोषित की गई नई अमेरिकी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है। तब ओबामा ने कहा था कि 21वीं सदी में एशिया प्रशांत क्षेत्र के भविष्य में अमेरिका अहम भूमिका निभाएगा।
पनेटा ने दक्षिण चीन सागर समेत कई मुद्दों को लेकर चीन और अमेरिका के बीच मतभेद की बात स्वीकार की, लेकिन इस बात से इंकार किया कि यह कदम क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हए उठाया गया है। पिछले साल नवंबर में नई अमेरिकी सामरिक नीति की घोषणा करते हुए ओबामा ने कहा था कि अमेरिका उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में अपने लड़ाकू विमान और 2500 सैनिक तैनात करेगा।

पनेटा ने कहा, वर्ष 2020 तक अमेरिकी नौसेना प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर में 50-50 प्रतिशत की युद्धपोतों की तैनाती को बदलते हुए एशिया प्रशांत में 60 और अटलांटिक में 40 प्रतिशत की तैनाती करेगा। उनका यह बयान शुक्रवार को एशिया प्रशांत क्षेत्र की सात दिवसीय यात्रा के शुरुआत में आया है। इस यात्रा का उद्देश्य अपने साझीदारों समेत क्षेत्र के देशों को जनवरी में लागू की गई अमेरिकी सैन्य रणनीति से अवगत कराना है।

एशिया प्रशांत में तैनात किए जाने वाले पोतों में छह विमान वाहक युद्धपोत, अधिकतर डेस्ट्रायर, लड़ाकू समुद्री जहाज और पनडुब्बियां शामिल हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान पनेटा भारत और वियतनाम भी जाएंगे। उनकी यह यात्रा फिलीपींस और चीन के बीच दक्षिण चीन सागर क्षेत्र की संप्रभुता पर अपना अधिकार जमाने को लेकर जारी तनाव के बीच हो रही है। दरअसल दक्षिण चीन सागर स्थित एक द्वीप पर चीन और फिलीपींस दोनों ही अपना दावा जताते हैं।
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