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ताउम्र जेल में कटेगी होस्नी मुबारक ‌की जिंदगी

काहिरा/एजेंसी

Updated Sat, 02 Jun 2012 12:00 PM IST
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मिस्र की नागरिक अदालत ने देश पर 30 साल तक निरंकुश शासन करने वाले पूर्व राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को शनिवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। पिछले साल अरब क्रांति की लहर में सत्ता विरोधी प्रदर्शन करने वालों की हत्या के आदेश देने के आरोप में उन्हें यह सजा दी गई है। मुबारक विरोधी प्रदर्शनों में सुरक्षाबलों से संघर्ष में करीब 850 लोग मारे गए थे।
25 जनवरी, 2011 को शुरू हुए जनविद्रोह ने 11 फरवरी, 2011 को मुबारक को सत्ता से बेदखल कर दिया था। यह पहला मौका है जब अरब विश्व में जनक्रांति की लहर के बाद किसी सत्ताधीश पर मुकदमा चला कर अत्याचारों के लिए सजा सुनाई गई। फैसला ऐसे समय आया है, जब दो हफ्तों बाद मिस्र में लोकतांत्रिक पद्धति से राष्ट्रपति चुना जाना है।

अस्पताल से स्ट्रेचर पर लाए गए पूर्व राष्ट्रपति ने ट्रेक सूट और काले रंग का चश्मा पहन रखा था। बिस्तर पर लेटे हुए फैसला सुनते वक्त उनका चेहरा पथराया हुआ था। उन्हें न्यायालय में उनके दो बेटों और अन्य आरोपियों के साथ एक पिंजरे में रखा गया था।

न्यायाधीश अहमद रेफात ने फैसले में मुबारक के शासनकाल को ‘घने अंधकार वाले काले दिन’ करार दिया। हालांकि न्यायाधीश ने मुबारक और उनके बेटों पर भ्रष्टाचार के आरोपों को रद्द कर दिया। इसके बावजूद मुबारक के बेटों, अला और गमाल को रिहा नहीं किया जाएगा। कुछ अन्य मामलों में उन पर मुकदमे चलेंगे।

पड़ा दिल का दौरा
खबर है कि फैसला सुनने के बाद न्यायालय से जेल जाते हुए मुबारक को दिल का दौरा पड़ा है। मुबारक का खराब स्वास्थ्य दस महीने की अदालती सुनवाई के दौरान उन्हें जेल न भेजने का बड़ा कारण था। इलाज के लिए उन्हें राजधानी के नजदीक एक भव्य भवन में रखा गया था।

मगर अब उन्हें तोरा जेल भेज दिया गया है। वहीं इलाज चलेगा। बताया गया है कि हेलीकॉप्टर से जेल जाते हुए मुबारक की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल दवाएं दी गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जेल जाते हुए मुबारक की आंखों में आंसू थे और वह हेलीकॉप्टर से बाहर आने को तैयार नहीं थे। उन्हें जबर्दस्ती निकाला गया।

सड़कों पर मना जश्न
मुबारक को सजा सुनाए जाने के बाद पूरे मिस्र में जश्न जैसा माहौल देखा गया। लेकिन जिस अदालत द्वारा मुबारक को सजा सुनाई गई उसके अंदर और बाहर का नजारा एकदम उलट गया।

सजा सुनाने के बाद जहां लोग कोर्ट के बाहर जश्न मनाते देखे गए वहीं कोर्ट के अंदर हाथापाई होने लगी। अदालत में मौजूद मुबारक विरोधी उम्रकैद की सजा सुनाए जाने से नाराज थे, वे लोग मुबारक के लिए फांसी की मांग कर रहे थे। वहां मुबारक समर्थक भी मौजूद थे, उनके बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। लोगों ने टीवी पर भी नजारा देखा।

ब्रदरहुड ने की दोबारा सुनवाई की मांग
मुबारक को उम्रकैद की सजा मिलने पर वहां के मुख्य कट्टरपंथी संगठन मुसलिम ब्रदरहुड ने नाखुशी जताई है। संगठन का कहना है कि ठोस सबूतों के साथ मुबारक के खिलाफ फिर से सुनवाई होनी चाहिए। संगठन ने एक बयान में कहा कि सरकारी वकील ने अपना दायित्व ठीक से नहीं निभाया। जुटाए गए पर्याप्त सुबूतों के आधार पर मुबारक को फांसी होनी चाहिए थी। एजेंसी

काहिरा जेल में रहेंगे मुबारक
उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद मिस्र के सरकारी अभियोजक ने हुस्नी मुबारक को काहिरा की तोरा बंदी गृह में भेजने का आदेश दिया है। मुबारक को सुनवाई के दौरान सेना के अस्पताल में रखा गया था।

अरबिक सेटेलाइट टीवी चैनल पर उस हेलीकॉप्टर को दिखाया गया है, जिसने ट्रायल कोर्ट से उड़ान भरकर तोरा बंदीगृह में लैंडिंग की। मालूम हो कि प्रदर्शनकारी बहुत पहले से मांग करते आ रहे थे कि मुबारक को सैन्य अस्पताल से हटाकर तोरा जेल भेजा जाए।

मुबारक जीवन तारीखों में
> 4 मई, 1928 को मेनोफिया प्रांत में काहिरा के नजदीक जन्म
> ब्रितानी मूल के सुजेन से विवाह
> पत्नी और दो बेटे जमाल और अला हैं परिवार में
> 1949 में मिस्र की मिलिट्री एकैडमी से ग्रैजुएशन किया
> 1950 में वायुसेना में शामिल हुए
> 1975 में उप राष्ट्रपति नियुक्त
> 14 अक्तूबर, 1981 को राष्ट्रपति पद की शपथ ली, तब तत्कालीन राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या कर दी गई थी
> 10 फरवरी, 2011 को सत्ता विरोधी आंदोलन के दबाव में मुबारक का राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देना पड़ा
> गिरफ्तारी के बाद मुबारक और उनके प्रशासन के 44 अधिकारियों को पांच अलग-अलग जेलों में रखा गया है
> इस्राइल के साथ शांति समझौता कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े राजनयिक की हैसियत से अपनी पहचान बनाई

तानाशाह के शासन का अंत
> 28 जनवरी, 2011 को राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को पद से हटाने के लिए लोग सड़क पर उतरे, इसे कुचलने को सेना बुलानी पड़ी थी। सरकार ने इंटरनेट और मोबाइल डेटा सर्विस तब पर बैन लगा दिया
> 1 फरवरी, 2011 : सत्ता छोड़ने की मांग करते हुए करीब 10 लाख प्रदर्शनकारी काहिरा के तहरीर चौक पर जुटे
> 2 फरवरी, 2011 : विरोधियों और समर्थकों के बीच झड़प, काफी संख्या में लोग मारे गए, 800 लोग घायल
> मिस्र के करीबी अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की ने मुबारक पर तुरंत गद्दी छोड़ने का दबाव बढ़ाया
> 9 फरवरी, 2011 : अमेरिकी उप राष्ट्रपति जो बाइडेन ने सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज करने का सुझाव दिया
> 10 फरवरी, 2011 : मुबारक का राष्ट्रपति पद से इस्तीफा, पत्नी और बेटों के साथ काहिरा छोड़ा

इतिहास तय करेगा मेरा भाग्य
ये वह प्यारा देश है! जहां मैंने अपनी जिंदगी गुजारी। मैं इसके लिए लड़ा और इसकी भूमि, प्रभुसत्ता और हितों की रक्षा किया, इसी सरजमीं पर मैं मरूंगा। इतिहास मेरे बारे में फैसला करेगा जैसा कि दूसरों के बारे में उसने किया है। हुस्नी मुबारक, पूर्व शासक मिस्र

एकाएक उभरे सत्ता में
राष्ट्रपति बनने से पहले मुबारक को दुनिया में कम ही लोग जानते थे। किसी ने भी शायद यह नहीं सोचा था कि 1981 में अनवर सादात की हत्या के बाद उप राष्ट्रपति के पद पर मौजूद हुस्नी मुबारक को राष्ट्रपति का पद सौंपा जाएगा और वह इतने वर्षों तक देश की कमान संभालेंगे।

मिस्र में आपातकाल से हालात
हुस्नी 30 साल तक मिस्र की सत्ता पर काबिज रहे। उनके प्रशासन में आपातकाल सी स्थिति रही क्योंकि कहीं भी पांच से अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर पाबंदी थी।

मौत से आंख मिचौली
मुबारक और मौत में हमेशा आंख मिचौली होती रही। उन पर कम से कम छह बार जानलेवा हमले हुए और वो हर बार बच गए। वह उस समय बाल-बाल बचे थे जब 1995 में अफ्रीकी देशों के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए इथोपिया गए थे और उनकी लिमोजिन कार को निशाना बनाया गया था।

पश्चिमी देशों से नजदीकी
गोलियों को छकाने के हुनर में माहिर पूर्व वायुसेना कमांडर मुबारक पश्चिमी देशों के विश्वसनीय सहयोगी रहे और इसी कारण वे अपने देश में शक्तिशाली विपक्ष को लंबे समय तक परास्त करने में कामयाब रहे।

अरब क्रांति का पहला मुकदमा
84 वर्षीय मुबारक ऐसे पहले अरबी नेता हैं जिन पर देश की जनता द्वारा मुकदमा चलाया जा रहा है। काहिरा की एक विशेष अदालत में मुबारक के खिलाफ दस महीने की सुनवाई के बाद उन्हें प्रदर्शनकारियों की हत्या मामले में दोषी पाया। अरब जगत के अनेक देशों में लोकतंत्र के समर्थन और सरकारों के विरोध में हुई अरब क्रांति के बाद से मुबारक पहले ऐसे नेता हैं जिन्हें सजा सुनाई गई।

क्या थे आरोप
मुबारक पर लगाए गए आरोपों के मुताबिक उन्होंने मिस्र क्रांति के 18 दिनों के दौरान निहत्थे प्रदर्शनकारियों की हत्या के आदेश दिए थे। मुबारक, उनके दो बेटों और भगोड़े व्यवसायी हुसैन सलेम पर भ्रष्टाचार के आरोप भी हैं। मुबारक पर 900 लोगों की हत्याओं में भागीदारी के आरोप हैं। ये हत्याएं पिछले साल तब की गईं थीं जब मिस्र के लोगों ने उनके खिलाफ बगावत कर दी थी। इसके बाद मुबारक को सत्ता छोड़नी पड़ी थी।
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