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फैसले के खिलाफ अपील नहीं करेंगे गिलानी

इसलामाबाद/एजेंसी Updated Sun, 27 May 2012 12:00 PM IST
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पाकिस्तान सरकार ने अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की दोषसिद्धि के खिलाफ अपील नहीं करने का फैसला किया है। शीर्ष कोर्ट ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को फिर से खोलने के लिए स्विस प्रशासन को पत्र लिखने में विफल रहने पर गिलानी को दोषी ठहराया था।
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मीडिया ने प्रधानमंत्री के वकील एतियाज एहसान के हवाले से कहा है कि कोर्ट के अवमानना मामले में प्रधानमंत्री गिलानी की दोषसिद्धि के खिलाफ अपील याचिका दायर नहीं की जाएगी। सरकार का यह फैसला संसद के निचले सदन के स्पीकर द्वारा गिलानी को अयोग्य ठहराए जाने से इनकार करने के दो दिन बाद आया है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि गिलानी और उनके मुख्य कानूनी और राजनीतिक सलाहकारों ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के मसले पर चर्चा की और फैसले के खिलाफ अपील नहीं करने का निर्णय लिया। कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करने की समय सीमा शनिवार दोपहर को खत्म हो गई।

शीर्ष कोर्ट ने राष्ट्रपति जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को दोबारा खोलने के लिए स्विट्जरलैंड को पत्र नहीं लिखने के आरोप में 26 अप्रैल को दोषी ठहराते हुए एक मिनट से भी कम समय की सांकेतिक सजा सुनाई थी। सरकार का कहना है कि वह राष्ट्रपति के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती है क्योंकि उन्हें देश और विदेश में छूट हासिल है।

सुप्रीम कोर्ट दिसंबर 2009 के बाद से ही सरकार पर राष्ट्रपति के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को खोलने का दबाव बना रही है। जरदारी समेत करीब 8000 से अधिक लोगों को पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ द्वारा लाए गए एक अध्यादेश से भ्रष्टाचार के मामलों से राहत मिल गई थी। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मुशर्रफ के अध्यादेश को खारिज कर दिया था।

24 मई को नेशनल असेंबली की स्पीकर फहमिदा मिर्जा ने फैसला किया था कि वह गिलानी को अयोग्य ठहराने के लिए चुनाव आयोग को कोई प्रस्ताव नहीं भेजेंगी।

उन्होंने कहा था कि गिलानी को संसद सदस्यता से अयोग्य ठहराने का सवाल ही नहीं उठता है। सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी से संबंधित स्पीकर ने अपना फैसला कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा के बाद लिया।

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