डिस्लेसिया और एड्स को भी भुनाया है बॉलीवुड ने

अनुराधा गोयल Updated Thu, 19 Jul 2012 12:00 PM IST
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फिल्म 'तारे जमीं पर' में दर्शील सफारी को डिस्लेसिया नामक बीमारी है जो है तो अन्य बच्चों की तरह सामान्य है लेकिन उसे चीजों की समझ नहीं है। वह जल्दी से चीजों को पहचान नहीं पाता। लेकिन अपनी बातों को एक्सप्रेस करने के लिए उसके पास चित्रकारी जैसा माध्यम है। फिल्म 'फिर मिलेंगे'और 'माइ ब्रदर निखिल' में एचआईवी एड्स जैसी बीमारी को हाईलाइट किया गया है।
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इसी तरह से फिल्म 'अजब प्रेम की गजब' कहानी और 'कमीने' के कलाकारों को हकलाते हुए दिखाया है। जो कभी तो सामान्य बात करते हैं और कभी अचानक से हकलाने लगते हैं। फिल्म 'दीवानगी' और 'अपरिचित' जैसी कितनी ही फिल्मों में मल्टीपल डिसआर्डर, स्प्लिट पर्सनेलिटी डिसऑर्डर दिखाया गया है। जिसमें नायिक या नायिका एक साथ दो-तीन लाइफ जीते हैं और उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं होता कि ऐसा उनके साथ हो रहा है।
इसी तरह से कई और फिल्मों में मेटंली चैलेंज्ड, हार्ट ट्रांसप्लांट, मल्टीपल पर्सनेलिटी, कोर्नियर ट्रांसप्लांट, पैरानोइया जैसी बीमारियों को दिखाया गया है।
सवाल - क्या फिल्मों में बीमारियों को गंभीरता से चित्रित किया जाता है ?
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