राजनीतिक विवादों से ओलंपिक का बहिष्कार

धर्मेंद्र आर्य Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
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ओलंपिक खेलों की ख्याति के बावजूद कई बार ऐसा भी हुआ कि खिलाड़ियों को इन खेलों से दूर रहना पड़ा। आयरलैंड ने 1936 में बर्लिन ओलंपिक खेलों का बहिष्कार कर दिया। इसके पीछे वजह यह थी कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने आयरलैंड को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में ओलंपिक में भाग लेने पर मना कर दिया था। वहीं, 1956 के मेलबर्न ओलंपिक खेलों से स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड और स्पेन ने अपने खिलाड़ियों को दूर रखा। इन देशों ने हंगरी में हुए विद्रोह में सोवियत संघ के अनुचित हस्तक्षेप के विरोध में मेलबर्न ओलंपिक में भाग नहीं लिया था। इनके अलावा स्वेज नहर विवाद के चलते मिस्र, कंबोडिया, इराक और लेबनान ने भी अपनी टीमें मेलबर्न नहीं भेजी।
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आईओसी ने 1964 में दक्षिण अफ्रीका पर रंगभेद के कारण प्रतिबंध लगा दिया। वहीं राजनीतिक विवादों के चलते चीन और ताइवान ने भी खेलों का बहिष्कार किया था। शीत युद्ध के दौर में कई देशों ने 1980 और 1984 में ओलंपिक खेलों से अपने को दूर रखा। सोवियत संघ के अफगानिस्तान में लड़ाई करने के विरोध 65 देशों ने मास्को ओलंपिक का विरोध किया था। जवाब में सोवियत संघ और 14 देशों ने 1984 में हुए लॉस एंजिल्स ओलंपिक का बहिष्कार किया था। इरान और लीबिया ने भी राजनीतिक कारणों से इन खेलों का बहिष्कार किया। इरान एकमात्र ऐसा देश है जिसने 1980 और 1984 दोनों ओलंपिक खेलों में भाग नहीं लिया था।
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