श्री ओंकारेश्वर/श्री अमलेश्वर

राकेश Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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sri omkareshwar jyoterlinga

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यह जयोतिर्लिंग मध्यप्रदेश में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर अवस्थित है। इस स्थान पर नर्मदा दो भागों में विभक्त हो जाने के कारण बीच में एक टापू सा बन गया। इस टापू को मान्धाता पर्वत या शिवपुरी कहते हैं। नदी की एक धारा इस पर्वत के उत्तर और दूसरी दक्षिण की ओर बहती है। दक्षिण वाली धारा ही मुख्य मानी जाती है। इसी मान्धाता पर्वत पर श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का मंदिर अवस्थित है। पूर्वकाल में महाराजा मान्धाता ने इसी पर्वत पर अपनी तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न किया था। इसी कारण इस पर्वत को मान्धाता पर्वत कहा जाने लगा।
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इस ज्योतिर्लिंग मंदिर के भीतर दो कोठरियों से होकर जाना पड़ता है। भीतर अंधेरा रहने के कारण वहां निरंतर प्रकाश जलता रहता है। ओंकारेश्वरलिंग मनुष्यनिर्मित नहीं है। स्वयं प्रकृति ने इसका निर्माण किया है। इसके चारों ओर हमेशा जल भरा रहता है। संपूर्ण मान्धाता पर्वत भगवान शिव का रूप माना जाता है। इसी कारण इसे शिवपुरी कहते हैं। कार्तिकी पूर्णिमा के दिन यहां बहुत भारी मेला लगता है। श्रद्धालु यहां शिव लिंग पर चने की दाल चढ़ाते हैं। रात्रि की शयन आरती का बड़ी भव्यता के साथ आयोजन होता है। इस ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दो स्वरूप हैं। एक को अमलेश्वर के नाम से जाना जाता है। यह नर्मदा के दक्षिण तट पर ओंकारेश्वर से थोड़ा दूर हटकर है। पृथक होते हुए भी दोनों की गणना एक ही मैं की जाती है।
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