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श्री वैद्यनाथ

राकेश Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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sri baidyanath jyoterlinga
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यह ज्योतिर्लिंग बिहार प्रांत के संथाल में अवस्थित है। इसकी स्थापना के बारे में यह कथा प्रचलित है कि एक बार राक्षसराज रावण ने हिमालय पर जाकर भगवान शिव का दर्शन पाने के लिए बड़ी कठिन तपस्या की। उसने एक-एक करके अपने सिर काटकर शिवलिंग पर चढ़ाने शुरू किए। इस प्रकार उसने अपने नौ सिर वहां काटकर चढ़ा दिये। जब वह अपना दसवां और अंतिम सिर काटकर चढ़ाने को तैयार हुआ तब भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होकर वहां प्रकट हुए। रावण का हाथ पकड़कर उन्होंने उसे सिर काटने से रोक दिया। उसके नौ सिर भी पहले की तरह जोड़ दिया और वर मांगने को कहा।
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रावण ने वर के रूप में भगवान शिव से उस लिंग को अपनी राजधानी लंका ले जाने की आज्ञा मांगी। भगवान शिव ने उसे यह वरदान तो दे दिया लेकिन एक शर्त भी लगा दी। उन्होंने कहा कि तुम इसे ले जा सकते हो किंतु यदि रास्ते में इसे कहीं रख दोगे तो यह वहीं अचल हो जाएगा। तुम फिर इसे उठा नहीं सकोगे। रावण इस बात को स्वीकार कर शिवलिंग उठाकर लंका की ओर चल दिया। रास्ते में रावण को एक जगह लघुशंका लगी।




वह शिवलिंग को एक अहीर को थमाकर लघुशंका की निवृत्ति करने लगा। अहीर शिव लिंग के बोझ को संभाल न सका और विवश होकर भूमि पर रख दिया। इस प्रकार शिवलिंग वहीं अवस्थित हो गया। बाद में रावण भी उसे उठा न सका। अंत में निरुपाय होकर उस पवित्र शिवलिंग पर अपने अंगूठे का निशान बनाकर उसे वहीं छोड़कर लंका लौट गया। इसके बाद ब्रह्मा, विष्णु आदि देवताओं ने वहां उसकी प्रतिष्ठा की। यह वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग अनंत फलों को देने वाला है। रोग मुक्ति के लिए इस ज्योतिर्लिंग की महिमा बहुत है।

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