विज्ञापन

श्री सेतुबंध रामेश्वर

राकेश Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
rameshwar jyoterlinga
ख़बर सुनें
इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचंद्र जी ने की थी। इसके बारे में यह कथा प्रचलित है कि जब भगवान राम लंका पर चढ़ाई करने के लिए जा रहे थे तब इसी स्थान पर उन्होंने समुद्रतट की बालुका से शिवलिंग बनाकर उसका पूजन किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि इस स्थान पर ठहरकर भगवान राम जल पी रहे थे कि आकाशवाणी हुई कि मेरी पूजा किए बिना ही जल पीते हो? इस वाणी को सुनकर भगवान श्रीराम ने बालुका से शिव लिंग बनाकर उसकी पूजा की तथा भगवान शिव से रावण पर विजय प्राप्त करने का वर मांगा। उन्होंने प्रसन्नता के साथ वर दिया। भगवान शिव ने लोक कल्याणार्थ ज्योतिर्लिंग के रूप में वहां निवास करने की सबकी प्रार्थना भी स्वीकार कर ली। तभी से यह ज्योतिर्लिंग यहां विराजमान है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस ज्योतिर्लिंग के बारे में एक दूसरी कथा भी है। जब भगवान श्रीराम रावण का वध करके लौट रहे थे तब उन्होंने अपना पहला पड़ाव समुद्र के इस पार गंधमादन पर्वत पर डाला था। वहां बहुत से ऋषि व मुनिगण उनके दर्शन को पहुंचे। उन सभी का आदर सत्कार करते हुए भगवान राम ने उनसे कहा कि पुलस्त्य के वंशज रावण का वध करने के कारण मुझ पर ब्रह्म हत्या का पाप लग गया है। आप लोग मुझे इससे निवृत्ति का कोई उपाय बताएं। वहां उपस्थित सारे ऋषियों व मुनियों ने एक स्वर से कहा कि आप यहां शिव लिंग की स्थापना कीजिए।



भगवान श्रीराम ने उनकी यह बात स्वीकार कर हनुमान को कैलास पर्वत जाकर वहां से शिव लिंग लाने का आदेश दिया। हनुमान तत्काल वहां पहुंचे किंतु उन्हें वहां उस समय भगवान शिव के दर्शन नहीं हुए। अतः वे उनका दर्शन करने को वहीं तपस्या करने लगे। कुछ काल पश्चात शिव के दर्शन होने पर हनुमान जी शिव लिंग लेकर लौटे किंतु तब तक शुभ मुहूर्त जाने की आशंका से यहां सीता जी के द्वारा लिंग स्थापन कराया जा चुका था। हनुमान जी को यह देखकर बहुत दुख हुआ। उन्होंने अपनी व्यथा भगवान श्रीराम को सुनाई। भगवान ने पहले ही लिंग स्थापित करने का कारण हनुमान जी को बताते हुए कहा कि यदि तुम चाहो तो इस लिंग को यहां से उखाड़कर हटा दो।




हनुमान जी अत्यंत प्रसन्न होकर उस लिंग को उखाड़ने लगे, किंतु बहुत प्रयत्न करने पर भी वह टस से मस नहीं हुआ। अंत में उन्होंने उस शिव लिंग को अपनी पूंछ में लपेटकर उखाड़ने का प्रयत्न किया। फिर भी वह अडिग रहा। उलटे हनुमान जी धक्का खाकर दूर गिरे और बेहोश हो गए। माता सीता जी पुत्र से भी प्यारे हनुमान के शरीर पर हाथ फेरती हुई विलाप करने लगीं। होश आने पर हनुमान ने भगवान श्रीराम को परमब्रह्म के रूप में सामने देखा। भगवान ने उन्हें शंकर जी की महिमा बताकर उनका प्रबोध किया। स्कंदपुराण में इसकी महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है।

Recommended

क्या कारोबार में लगाया हुआ धन फंस जाता है ? करें उपाय
ज्योतिष समाधान

क्या कारोबार में लगाया हुआ धन फंस जाता है ? करें उपाय

जानें क्यों कायम है आपकी नौकरी पर संकट?
ज्योतिष समाधान

जानें क्यों कायम है आपकी नौकरी पर संकट?

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Astrology Archives

मेष राशि के जातक का गुण, स्वभाव और व्यक्तित्व

इस राशि चिह्न के तहत जन्में व्यक्ति जीवन की नई ऊर्जा से भरे हुए रहते हैं। इनकी मासूमियत लोगो को आकर्षित करती है। ये करिश्माई, साहसी और दोस्ताना होते हैं।

8 अक्टूबर 2018

विज्ञापन

फिरोजाबाद में एक दिन के पीएम बनने पर लोगों ने रखी अपनी राय, कहा इस मुद्दे पर करेंगे वोट

अमर उजाला का चुनावी फिरोजाबाद पहुंचा। जहां पर लोगों ने एक दिन के पीएम बनने पर कहा शिक्षा और स्वास्थय पर करेंगे काम ।

13 मार्च 2019

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree