कुछ ऐसे ही शांति का भी करियर हुआ तबाह

राम शंकर Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
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ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी खिलाड़ी के जेंडर को लेकर विवाद हुआ हो। 2006 के दोहा एशियाई खेलों में भारत की मध्यम दूरी की धाविका शांति सौंदाराजन से लिंग परीक्षण में असफल रहने के बाद 800 मीटर पैदल चाल का रजत पदक छीन लिया गया था। शांति ने अपने बचाव में बस इतना ही कहा, 'कोई उससे पदक छीन सकता है, किसी महिला का अस्तित्व नहीं। वह महिला है और यही उसकी सच्चाई है।'
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तमिलनाडु की शांति ने शुरुआती दौर में ही अपनी प्रतिभा और खेल से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। एथलीट के अलावा वह हॉकी और जेवलिन (भाला फेंक) की भी बेहतरीन खिलाड़ी रहीं। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उसने 800 मीटर, 1500 मीटर और 3000 मीटर की रेस जीती। एशियन चैंपियनशिप में उसने 800 मीटर पैदल चाल का रजत पदक जीता था। दोहा के एशियन गेम्स में भी उसने यही कारनामा दुहराते हुए सिल्वर मेडल जीता। हालांकि जेंडर टेस्ट में असफलता ने उसके करियर को तबाह कर दिया। शांति इन दिनों पुदुकोटि में स्पोर्ट्स कोच है और होनहारों को तराश रही है।
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