अजूबे से कम नहीं है पिंकी की सफलता

राम शंकर Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
success of pinki is miracle
10 अप्रैल 1986 को पश्चिम बंगाल के पुरूलिया में जन्मी पिंकी की सफलता की कहानी किसी अजूबे से कम नहीं है। पहली सफलता की गाथा उसने महज 17 साल में लिखी। एशियन इंडोर एथलेटिक्स में उसने दो मेडल जीतकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। 400 और 800 मीटर रिले दौड़ में पिंकी ने जब देश को तमगा दिलाया तो हर कोई उसका मुरीद हो गया।



उन्होंने 2006 में कतर के दोहा में हुए एशियाई खेलों में चार सौ मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता और उसी साल मेलबर्न में राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने रजत पदक जीता। कार दुर्घटना में बुरी तरह जख्मी होने के बाद ऐसा लगा कि इस खिलाड़ी का करियर कहीं खत्म न हो जाए। पर 2007 में पिंकी ने जोरदार वापसी की। हालांकि पिंकी तीन साल पहले ही संन्यास ले चुकी हैं।

सवाल- क्या आपको लगता है कि पिंकी प्रमाणिक के साथ नाइंसाफी हुई है?

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