भारत में मानसूनी चक्र

विनीता वशिष्ठ Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
cycle of monsoon in india
भारतीय परिदृश्य की बात की जाए तो यहां मानसून चार माह जून से सितंबर तक सक्रिय रहता है। जब सूर्य कर्क रेखा के ऊपर होता है तो भारतीय भू-भाग की हवा गर्म होकर ऊपर की ओर उठकर बाहर की ओर बहने लगती हैं। इससे पूरा क्षेत्र कम दबाव वाला विशाल क्षेत्र बन जाता है। यह क्षेत्र उच्च दबाव क्षेत्र से हवाओं को आमंत्रित करता है। इन चार माह में दिनों भारतीय उपमहाद्वीप के तीन ओर से घिरे समुद्र में उच्च दबाव का क्षेत्र होता है क्योंकि समुद्र धरती की अपेक्षा कम ऊष्मता लिए है। ऐसे में उच्च दबाव वाले इलाके से से कम दबाव वाले इलाके की ओर ये हवाएं बहने लगती हैं।



बारिश तेरे कितने रूप


मानसून के चलते तीन प्रकार की बरसात होती है। चक्रवातीय, पर्वतीय तथा संवहनीय। आर्द्र मानसून हवाएं जब पर्वत से टकराती है तो ऊपर उठ जाती हैं, परिणामस्वरूप पर्याप्त बारिश होती है। ज्यों-ज्यों उंचाई बढ़ती है तापमान कम होने लगता है। 165 मीटर ऊपर जाने पर एक डिग्री सेंटीग्रेट तापमान कम हो जाता है। हवाएं जब ऊपर उठती हैं तो इसमें मौजूद वाष्पकण ठंडे होकर पानी की बूंदों में बदल जाते है। जब पानी की बूंद भारी होने लगती है तो यह धरती पर गिरती है। इसे हम बारिश कहते हैं। चूंकि मानसूनी हवा में वाष्पकण भरपूर मात्रा में होते हैं इसलिए बारिश भी जमकर होती है।

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