निर्वाचन की पद्धति

अवनीश पाठक Updated Wed, 13 Jun 2012 12:00 PM IST
Method of election
राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष निर्वाचन के माध्यम से होता है यानि चुनाव आम जनता की जगह उनके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि करते हैं। इन प्रतिनिधियों को मिलाकर इलेक्टोरल कॉलेज या निर्वाचक मंडल का गठन किया जाता है। इसमें संसद के दोनों सदनों के सदस्य, राज्यों की विधानसभा के सभी निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। दो केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली व पांडिचेरी के विधायक भी चुनावों में हिस्सा लेते हैं।
कैसे निर्धारित होता है मत मूल्य

संविधान के अनुच्छेद 55(2) के अनुसार राज्य विधानसभाओं व संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा दिए जाने वाले मतों के मूल्य के आधार पर राष्ट्रपति का चयन होगा। मत मूल्य निम्न फार्मूले से निर्धारित किया जाता है।



प्रत्येक राज्य की विधानसभा के सदस्य के मतों की संख्या निकालने के लिए उस राज्य की कुल जनसंख्या (जो पिछली जनगणना के अनुसार निर्धारित है) को राज्य विधानसभा की कुल निर्वाचित सदस्य संख्या से विभाजित करके भागफल को 1000 से विभाजित किया जाता है। इसी प्रकार संसद सदस्य का मत मूल्य निर्धारित करने के लिए राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मत मूल्यों को जोड़कर संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों के योग का भाग दिया जाता है।

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