डॉल मेकिंग

विनीता वशिष्ठ Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
doll making
बचपन में तो गुड्डे गुड़िया बनाई ही जाती हैं लेकिन इसका शौक क़ई लोगो को ताउम्र रहता है। भारत ही नहीं विदेशों में भी डॉल मेकिंग एक बड़ी हॉबी के रूप में विकसित हो रहा है। डॉल मेकिंग कोर्स में पेपर फोल्डिंग और मेटिरियल डिजाइन से लेकर हेयर डिजाइनिंग भी शामिल होती है। राजस्थानी गुड़िया से लेकर क्रिश्चिय डॉल भी इस कोर्स में बनानी सिखाई जाती हैं। डॉल मेकिंग कोर्स की अवधि एक माह से दो माह के बीच होती है।
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