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ताकि किसान और जमीन खुशहाल रहें

विनीता वशिष्ठ Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
so  farmers and land Be happy
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एक पुराना नुस्खा है, जब समस्या बहुत बढ़ जाए तो मूल की ओर लौटो। साठ के दशक में हरित क्रांति के नारे से उत्साहित होकर ज्यादा से ज्यादा अन्न उपजाने की होड़ चली। इस होड़ में किसान ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल किया। इससे फसल तो बढ़ी लेकिन जमीन चौपट हो गई और किसान की किस्मत उससे रूठ गई। बंजर जमीन, चौपट फसलचक्र और बढ़ता कर्ज। ऐसे में किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो गया।



इन घटनाओं ने संकेत दिया कि अब ऑरगेनिक खेती की ओर लौटने का समय आ गया है। भारत में पहले भी यही खेती दस्तूर में थी। अब फिर से देश के अधिकतर राज्य इस दिशा में कदम उठा चुके हैं और किसान की हालत पहले से सुधरी है। देखा जाए तो यह शुभ संकेत है, हम सबके लिए।



क्या आपको लगता है कि कम अन्न उपजाने के बावजूद ऑरगेनिक खेती किसान और जमीन के हित में है। क्या ऑरगेनिक खेती को बढ़ावा देने से किसान का भला होगा?

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