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फर्जी नहीं नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो

Updated Mon, 02 Jul 2012 12:00 PM IST
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छत्तीसगढ़ के गोलकुंडा में नक्सलियों के खिलाफ सीआरपीएफ की कार्रवाई किसी भी लिहाज से फर्जी नहीं था। बीते 28-29 जून की रात गोलकुंडा के जंगल में नक्सलियों और सीआरपीएफ के बीच हुई गोलीबारी पर उठ रहे सवालों पर गृह मंत्रालय ने कहा है कि उस मुठभेड़ में कोबरा कमांडो के छह जवान भी घायल हुए हैं। गृहसचिव आरके सिंह के मुताबिक कमांडो को लगी गोली कम रेंज वाले हथियारों से फायर की गई थी जिन्हें नक्सली इस्तेमाल करते हैं। लिहाजा इस मामले में किसी विशेष जांच की जरूरत नहीं है।
गौरतलब है कि गोलकुंडा के सिलगर जंगल में हुई इस मुठभेड़ में 20 नक्सली मारे गए और सीआरपीएफ के छह कमांडो घायल हो गए थे। मारे जाने वालों में पंद्रह साल की एक लड़की भी थी, जिसे लेकर इस मुठभेड़ पर सवाल उठने लगे थे। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र सच्चर और समाजसेवी स्वामी अग्निवेश ने आरोप लगाया है कि इस कार्रवाई में सीआरपीएफ ने जानबूझ कर गांव वालों को निशाना बनाया है। लेकिन सीआरपीएफ के निदेशक विजय कुमार ने कहा कि रात के वक्त गश्त लगा रहे सुरक्षा बलों पर एकाएक गोली चली। सुरक्षा बलों ने प्रतिक्रिया में फायर करना शुरू कर दिया। दरअसल यह घुप अंधेरे में हुई कार्रवाई का नतीजा है। विजय कुमार ने सवाल उठाया कि रात के करीब बारह बजे जंगल के बीच गांव वाले क्या करने गए थे।

सुरक्षा बल के एक उच्चपदस्थ अधिकारी ने बताया कि दरअसल उस रात अंधेरे में किसी को कुछ नहीं दिख रहा था। सुबह जब मुठभेड़ स्थल का मुआयना किया गया तो 17 लाशें मिलीं। इनमें से तीन मरक्कम सुरेश, मरक्कम नरेश और लिरुपासुमुलू खूंखार नक्सली हैं। बाकी की शिनाख्त अभी पूरी तरह नहीं हो पाई है।

अधिकारी के मुताबिक आंध्र प्रदेश के खुफिया विभाग ने जानकारी दी थी कि सिलगर के जंगल में नक्सलियों की सेंट्रल रीजनल कमेटी (सीआरसी) की बैठक होने वाली है जिसमें 60 से 80 नक्सली मौजूद रहेंगे। इसी की घेराबंदी के लिए सीआरपीएफ की तीन टीमें अलग अलग दिशाओं से इस जगह को घेरने के लिए पैदल कूच कर गईं। सिलगर के जंगल में रात को नक्सलियों ने गोली चला दी और सुरक्षा बल की जवाबी कार्रवाई में उनके लोग मारे गए।

अधिकारी के मुताबिक यह सभी जानते हैं कि नक्सली गांवों के बच्चों और लड़कियों को जबरन अपने कैडर में शामिल करते हैं। इस कैडर को जन मिलिशिया के नाम से जाना जाता है। इनका मुख्य इस्तेमाल वह ढाल के तौर पर करते हैं। इस मुठभेड़ में भी यही हुआ है। अपने को घिरता देख नक्सलियों ने जन मिलिशिया के लड़ाकों को सामने लाकर गोलियां चला दीं। सुरक्षा बल उनमें उलझ गए और असल नक्सली अंधेरे का फायदा उठा कर भाग खड़े हुए। अगर यह दिन का वक्त होता तो संभव है कि सीआरपीएफ की कार्रवाई कुछ और होती।
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