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अंकों के खौफ में उलझी यूपी की पुलिस

मुरादाबाद/ब्यूरो Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
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अपराधी हाईटेक हो गए और उनका पीछा करते करते हमारी पुलिस भी हाईटेक हो रही है। थानों को भी कंप्यूटरीकृत किया जा रहा है और पुलिस को साइबर क्राइम से रूबरू कराया जा रहा है। लेकिन आज भी थानों के सैकड़ों पुलिसकर्मी अंकों के गणित में बुरी तरह उलझे हैं। अंकों का खौफ इस कदर हावी है कि कई तारीखों पर न तो रवानगी होती है और न ही आमद।
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अंक गणित का अपना अलग फंडा है। किसी के लिए एक का अंक शुभ है किसी के लिए पांच का। कोई 11, 17, 18, 25 और 29 तारीखों को शुभ मानता है। यही हाल हमारी पुलिस का है। पुलिस में भर्ती हो रही नई पीढ़ी भले ही इन अंकों के योग को न मानती हो, लेकिन पुराने जानकार आज भी अंक ज्योतिष पर यकीन रखते हैं। तभी तो थानों में पुराने पुलिसकर्मी 3, 13 व 23 तारीख को अपनी रवानगी नहीं कराते और 8, 18, 28 तारीखों को आमद नहीं होती।

बाकायदा जीडी पर भी इन तारीखों में कोई और ब्योरा, केस आदि दर्ज कर लिया जाता है। रवानगी एक दिन पूर्व दर्शायी जाती है या फिर एक दिन बाद। भले ही अंकों की गुत्थी उनकी समझ में नहीं आती, लेकिन थाने में आने वाली अगली पीढ़ी को इन अंकों के आधार पर नसीहत जरूर दी जाती है।

मुगलपुरा थाने के इंस्पेक्टर एसएस राणा ने बताया कि 3, 13, 23 को पुराने पुलिसकर्मी शुभ नहीं मानते। कई होटलों में भी 13 नंबर का कमरा नहीं होता। हालांकि अब नए भर्ती होने वाले जवान इस बात पर विचार नहीं कर रहे। खुद मैं भी इन बातों को नहीं मानता। एसएसपी सुनील कुमार गुप्ता की मानें तो यह धारणा काफी पहले से चली आ रही है। पुराने लोग तारीख, दिन, समय, दिशा आदि बातों का भी खास ख्याल रखते हैं। नई पीढ़ी इस धारणा को तोड़ रही है।

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