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प्रतापगढ़ की घटना पर यूपी विधानसभा में हंगामा

लखनऊ/ब्यूरो Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
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प्रतापगढ़ में पिछले दिनों एक नाबालिक बच्ची के साथ बलात्कार के बाद हुई हिंसा और आगजनी की घटना को लेकर शुक्रवार का विधानसभा में माहौल काफी गरमा गया। विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी घटना के पीछे गहरी साजिश बताते हुए इसकी गहराई से जांच कराने की मांग की।
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संसदीय कार्यमंत्री मो. आजम खां ने प्रतापगढ़ की घटना को पिछली सरकार की छाया बताते हुए कहा कि इसकी गहराई से जांच कराकर सरकार षडयंत्रकारियों को बेनकाब करेगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि कहीं यह पूरे प्रदेश को जलाने की साजिश तो नहीं थी।

उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में इस तरह की घटनाओं पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण दिया गया। कानून का राज कायम करने में यकीनन थोड़ा वक्त लगेगा लेकिन सरकार जल्द से जल्द कानून का मजाक उड़ाने वालों को कानून के दायरे में रहकर जीने का सलीका सिखाएगी। उन्होंने कहा कि आगजनी से पीड़ितों को सरकार पक्का घर बनवाकर देगी।

शून्य प्रहर में कांग्रेस के प्रमोद तिवारी व बसपा के राजबली जैसल ने कामरोको प्रस्ताव के जरिये प्रतापगढ़ की घटना का मामला उठाते हुए कहा कि अगर पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती तो हालात इतने न बिगड़ते। सदस्यों ने कहा कि कुंडा थाना क्षेत्र में 20 जून को हुई घटना के बाद जिले में इसी तरह की कुछ और वारदातें भी हुईं।

प्रमोद ने घटना की न्यायिक जांच कराने तथा आगजनी से बेघर हुए लोगों के पुनर्वास की मांग की है। उन्होंने कहा कि आगजनी से बेघर हुए लोग 15 किलोमीटर दूर एक मदरसे में शरण लिए हुए हैं। सरकार को इनके पुनर्वास की व्यवस्था करके इनमें विश्वास बहाल करने की पहल करनी चाहिए ताकि स्थिति सामान्य हो सके।

नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस मामले में प्रतापगढ़ के डीएम, एसपी समेत अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री को बधाई दी।

मौर्य ने कहा कि जिस थानाध्यक्ष व उप निरीक्षक के कारण दो बड़ी घटनाएं हुईं, वे आज भी वहीं मौजूद हैं। जो बचे हैं उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को कठोर होना पड़ेगा। अराजक तत्वों को खुली छूट देने से कोई सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि बेगुनाहों को परेशान न किया जाए।

पशुधन मंत्री पारस नाथ यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर मौके पर गए प्रतिनिधिमंडल में वह भी शामिल थे। घटना के पीछे की साजिश पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रमोद तिवारी, स्वामी प्रसाद मौर्य, राजा राम पाण्डेय, राजा भइया जैसे वरिष्ठ सदस्य प्रतापगढ़ के ही हैं। ये चाहें तो खुद चिह्नित कर सकते हैं कि घटनाओं के पीछे कौन है और लोगों को उकसाकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहा है।

पता चला है कि जहां घटना हुई है वहां जंगल के पास दो साधु रहते थे जो घटना के बाद से गायब हैं। बच्ची की मौत के बाद जिस तरह हजारों की भीड़ इकट्ठा हो गई वह भी किसी तरफ संकेत करती है।

आलमबदी ने मुसलिम समुदाय के बच्चों को आरोपी बनाए जाने का मामला उठाते हुए कहा कि आगजनी से प्रभावित मुसलिम परिवारों को पांच-पांच लाख की सहायता दी जानी चाहिए।

आजम ने कहा कि पिछली सरकार में ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई न होने से अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। आगजनी पीड़ितों को पहले 50 हजार रुपये दिए गए थे, बाद में दो लाख और दिए गए हैं। बच्ची के परिजनों को भी पांच लाख रुपये की सहायता दी गई है।

सरकार ने तय किया है कि जिनके मकान जले हैं उन्हें लोहिया आवास या किसी अन्य योजना के तहत एक कमरे का पक्का घर बनाकर दिया जाएगा जिसमें किचेन व शौचालय भी होगा। जहां तक गुनहगार या बेगुनाह की बात है तो यह फैसला सरकार करेगी। जो गुनहगार होंगे वे बचेंगे नहीं और बेगुनाहों को परेशान नहीं किया जाएगा। थानाध्यक्ष व दारोगा के अभी तक तैनात होने का मामला दिखवा लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के एक मंत्री ने अहम जानकारी दी है और साजिश की तरफ इशारा किया है। इस पक्ष को भी देखा जाएगा और षडयंत्र का खुलासा किया जाएगा। कानून अपना काम कर रहा है। पीड़ितों को अगर किसी और सहायता की जरूरत होगी तो वह भी मुहैया कराई जाएगी। मौके पर अस्थायी चौकी कायम कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया है कि अगर जरूरत होगी तो स्थायी पुलिस चौकी स्थापित की जाएगी।

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