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नोएडा एक्सटेंशनः मास्टर प्लान को मंजूरी

नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
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नोएडा एक्सटेंशन के सभी विवादों का निपटारा अब बस हाथभर की दूरी पर है। इंडिया हैबिटेट सेंटर में चार घंटे चली मैराथन बैठक के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मास्टर प्लान-2021 को प्लानिंग कमेटी ने मंजूरी दे दी।
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अब यहां निर्माण कार्य शुरू किए जा सकेंगे, जिससे किसानों और निवेशकों के सामने से सालभर से चल रही अनिश्चितता लगभग खत्म हो गई है। 15 जुलाई को प्लानिंग बोर्ड की मंजूरी के बाद यहां विकास का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।

कमेटी ने मास्टर प्लान-2021 को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के लिए रिकमंड कर दिया है। बोर्ड में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के साथ विचार-विमर्श के साथ प्लान को मंजूरी दे दी जाएगी। अब यह प्रस्ताव प्लानिंग बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। संभावना है कि 15 जुलाई के आसपास बोर्ड की बैठक हो सकती है।

गौरतलब है कि 21 अक्टूबर, 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को निर्माण कार्य शुरू करने से पहले एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी और मास्टर प्लान 2021 के तहत ही ग्रेटर नोएडा में कोई निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। कोर्ट के फैसले के बाद से ही लोगों की निगाहें प्लानिंग बोर्ड पर टिकी हुई थीं। अमर उजाला 26 जून के संस्करण में यह बात छाप चुका है कि 28 जून को प्लानिंग कमेटी बैठक में मास्टर प्लान-2021 को मंजूरी मिलना लगभग तय है।

इससे पहले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण मास्टर प्लान-2021 को प्लानिंग कमेटी के समक्ष चार बार प्रस्तुत कर चुका है, लेकिन कुछ खामियां होने के कारण मंजूरी नहीं मिल सकी। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की मैम्बर सेक्रेट्री नैनी जैसीलन ने बताया कि मास्टर प्लान-2021 में 16 प्रतिशत एरिया हरियाली और 20 से 25 प्रतिशत एरिया ईडब्लूएस/एलआईजी के लिए आरक्षित रखा गया है। साथ ही पीने के पानी, सीवरेज, नाले, जल निकासी, बिजली, पर्यावरण और भविष्य में मेट्रो के परिचालन का विशेष ध्यान रखा गया है।

जैसीलन ने बताया कि मास्टर प्लान-2021 को बोर्ड के अध्यक्ष कमलनाथ तथा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के साथ अन्य सदस्यों की बैठक में रखा जाएगा।

मंजूरी की खास शर्तें
-कमेटी ने शर्त रखी है कि एक्सटेंशन में रहने वाले लोगों के लिए पानी की सप्लाई, सीवेज, ड्रेनेज, बिजली, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का इंतजाम होना चाहिए।
-एक्सटेंशन का 16 फीसदी क्षेत्र हरा-भरा होना चाहिए। भविष्य में किसी भी सूरत में इसे न हटाया जाए।
-सेक्टरों के लेआउट प्लान में 20-25 फीसदी मकान ईडब्ल्यूएस/एलआईटी की व्यवस्था होनी चाहिए।
-बिना प्रदूषण की इंडस्ट्री स्थापित की जाएं।
-पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जाए।
-लोगों के आने-जाने के लिए मेट्रो समेत सड़क आदि की भी व्यवस्था की जाए।

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