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मक्का में जुंदाल ने बनाया था पहला ठिकाना

गुंजन कुमार/नई दिल्ली Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
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26/11 हमले की साजिश को अंजाम तक पहुंचाने और पाकिस्तान छोड़ने के बाद अबू जुंदाल ने सऊदी अरब के मक्का शहर में अपना ठिकाना बनाया था। वहां अपनी संदिग्ध गतिविधियों के चलते वह खुफिया एजेंसियों के रडार पर आया। लेकिन भारतीय एजेंसियां उसके पास मौजूद दो पहचान पत्रों की वजह से कुछ दिनों तक गफलत में रहीं।
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दरअसल जुंदाल के पास पाकिस्तान सरकार की ओर से जारी दो पहचान पत्र थे। रियासत अली के नाम से बना एक पहचान पत्र उर्दू में और दूसरा अंग्रेजी में। गृहमंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्र के मुताबिक उर्दू पहचान पत्र पाकिस्तान के लिए था और अंग्रेजी में बना आई कार्ड पाकिस्तान से बाहर के लिए।

सूत्र ने कहा कि पासपोर्ट के अलावा पाकिस्तान सरकार के पहचान पत्र जारी होना दर्शाता है कि 26/11 के साजिशकर्ताओं को वहां के सरकारी नुमाइंदों का किस कदर समर्थन हासिल था। इसीलिए मंत्रालय ने कड़ा रुख लेते हुए बृहस्पतिवार को साफ किया है कि भारत फिलहाल पाकिस्तान के साथ जुंदाल के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं करेगा।

गौरतलब है कि जुंदाल का असली पाकिस्तानी पासपोर्ट भी रियासत के नाम से ही है। जुंदाल के पूछताछ कर रहे अधिकारियों ने ‘अमर उजाला’ से बताया कि 2010 के दिसंबर में मक्का में स्पॉट होने के बाद भारतीय खुफिया एजेंसी ने उसके मोबाइल नंबर को भारत और पाकिस्तान के मोबाइल गेटवे पर डाल दिया। पाकिस्तान में हुई उसकी बातचीत को कुछ दिनों तक सुनने के बाद एजेंसी को यकीन होने लगा कि कराची कंट्रोल रूम में मौजूद हिंदी जानने वाला यह वही शख्स है, जिसकी उन्हें तलाश है।

एजेंसियों की कोशिशों से उसका असली नाम भी खुला और तय हो गया कि यह महाराष्ट्र के बीड जिले का जैबुद्दीन अंसारी ही अबू जुंदाल है। 2006 के औरंगाबाद हथियार कांड में इसकी तलाश पहले से थी। दिल्ली के जामा मसजिद ब्लास्ट में गिरफ्तार मोहम्मद आदिल नाम के शख्स ने भी जुंदाल के बारे में पुलिस को जानकारी दी थी।
इस मुकाम तक पहुंचने के बाद भारतीय एजेंसी ने सऊदी सरकार और वहां की खुफिया एजेंसी रियासत-अल-इस्तीख-बरार-अल-अमाह से जुंदाल को गिरफ्तार करने की गुजारिश की।

मई, 2011 में जुंदाल को मक्का से पकड़ कर राजधानी रियाद लाया गया। लेकिन सऊदी सरकार उसकी पहचान पुख्ता किए बिना सौंपने को राजी नहीं थी। भारतीय एजेंसी ने जुंदाल के असली नाम जैबुद्दीन अंसारी के बीड आईटीआई डिग्री और 12वीं के रिकार्ड पेश किए। बताया जा रहा है कि सऊदी प्रशासन को संतुष्ट करने के लिए जुंदाल के पिता के खून का नमूना भी भेजा, ताकि डीएनए जांच से पहचान हो।

जुंदाल की खबर सुन चौंक गया कसाब
26/11 के मुंबई हमलों का एकमात्र जीवित गिरफ्तार आतंकी अजमल कसाब यह सुनकर हैरत में पड़ गया कि उसे हिंदी सिखाने वाला टीचर और लश्कर-ए-तोइबा का सदस्य अबु जुंदाल गिरफ्तार हो गया है। आर्थर रोड जेल में बंद कसाब को जब जुंदाल की खबर दी गई, तो उसने सवालों की झड़ी लगा दी... कहां पकड़ा? ...कैसे पकड़ा? ...क्या वह अकेले पकड़ा गया?

जेल सूत्रों के अनुसार कसाब यह भी जानना चाहता था कि क्या जुंदाल को मुंबई लाकर इसी जेल में रखा जाएगा? उल्लेखनीय है कि जेल में कसाब को अखबार नहीं दिए जाते। सूत्रों के अनुसार कसाब के सेल की रक्षा करने वाले गार्ड आम तौर पर उससे बात नहीं करते, लेकिन कभी कुछ बात जरूर करते हैं। कसाब ने विशेष अदालत में अपने बयान में कहा था कि अबू जुंदाल ने मुंबई पर हमला करने वाले दस आतंकियों को हिंदी सिखाई थी। अकेला जुंदाल ही था, जो कराची से हमलावरों से संपर्क के दौरान हिंदी में बात कर रहा था।

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