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ऑनर किलिंग को लेकर पुलिस गंभीर नहीं

प्रियंवदा सहाय/नई दिल्ली Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
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ऑनर किलिंग पर राष्ट्रीय महिला आयोग की जांच पड़ताल में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। ऐसी हत्याओं के मामले में तैयार एक रिपोर्ट में आयोग ने कहा है कि प्रतिष्ठा के नाम पर होने वाली इन हत्याओं के लिए सिर्फ परिजन ही नहीं, पुलिस की अनदेखी भी अहम भूमिका निभा रही है।
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पिछले एक साल में आयोग के समक्ष चार हजार जोड़ों ने परिवार व समाज से डर कर पुलिस सुरक्षा की गुहार लगाई। आयोग का आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायतों को संज्ञान नहीं लिया। आयोग के अनुसार, उसके पास सुरक्षा मुहैया कराने के लिए आवेदनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑनर किलिंग का खौफ बहुत है। अपनी हत्या के डर के बीच शादी की इच्छा रखने वाले युगल या नवविवाहित दंपति अकेले पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में ही पुलिस संरक्षण के लिए रोजाना कम से कम 50 आवेदन दे रहे हैं। इस रिपोर्ट में आयोग ने हत्या के भय का विस्तार से उल्लेख किया है।

आयोग के मुताबिक पुलिस द्वारा सुरक्षा आवेदनों को गंभीरता से नहीं लेने, ऑनर किलिंग की गहराई से छानबीन न करने और सबूत के अभाव में तत्काल निष्कर्ष पर पहुंचने से यूपी, हरियाणा, मध्यप्रदेश और राजस्थान में ऐसे मामले बढ़ रहे हैं। आयोग ने इन हत्याओं के लिए मीडिया के चलन में ‘ऑनर’ (प्रतिष्ठा) शब्द के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने पर जोर दिया है। ताकि इन हत्याओं को कोई जायज न ठहरा सके।

आयोग की सदस्य चारु वलीखन्ना ने बताया कि ऑनर किलिंग के मामलों को संज्ञान में लेते हुए महिला आयोग ने पिछले छह माह में कई जांच समितियां गठित की हैं। अब इन समितियों की रिपोर्ट को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को सौंपा जाएगा।

राज्य फास्ट ट्रैक कोर्ट में निपटाएं ऐसे मामले
रिपोर्ट में राज्य सरकारों से ऑनर किलिंग के मामलों की पुख्ता जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही राज्य सरकारों से सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है कि ऐसे मामले फास्ट ट्रैक या विशेष कोर्ट में चलें, जिनका तय अवधि में निपटारा हो। इसके अलावा रिपोर्ट में स्थानीय प्रशासन को महिलाओं की सुरक्षा का जिम्मा उठाने और बाल विवाह पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई है।
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